किसान को उत्पादक से उद्यमी और चंपारण को ग्रामीण समृद्धि का मॉडल बनाना हमारा लक्ष्यः राधा मोहन
मोतिहारी। तीन दिवसीय कृषि, पशुपालन, मत्स्यकीय उद्यमी उन्नति मेला-2026 के अंतिम दिन आयोजित पशुपालक, मत्स्यपालक, बागवान एवं मधुमक्खी पालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसान की समृद्धि केवल फसल उत्पादन से नहीं, बल्कि पशुपालन, मत्स्यपालन, बागवानी एवं मधुमक्खी पालन जैसे अतिरिक्त आय के स्रोतों से होगी।
उन्होंने कहा कि कृषि नीति का लक्ष्य अब केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि लागत घटाना, उत्पाद का मूल्य बढ़ाना, प्रसंस्करण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर किसान को कृषि-उद्यमी बनाना है। पशुपालन को किसानों की आय का मजबूत आधार बनाने के लिए पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण एवं बाजार की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।
मोतिहारी के मदर डेयरी प्लांट का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा कि यह चंपारण के पशुपालकों को संगठित बाजार से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। इसके विस्तार से दूध प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धित उत्पादों की क्षमता बढ़ेगी और पशुपालकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत से मदर डेयरी का विस्तारिकरण किया जायेगा, जिसमें दूध के अतिरिक्त अन्य उत्पादों का भी उत्पादन होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में मत्स्यपालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं।
किसानों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने “एक किसान—अनेक आय-स्रोत” की सोच अपनाने का आह्वान किया। श्री सिंह ने युवाओं और महिलाओं से कृषि आधारित क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि चंपारण को कृषि-आधारित प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य, बागवानी और ग्रामीण उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि किसान को उत्पादक से उद्यमी और चंपारण को ग्रामीण समृद्धि का मॉडल बनाना हमारा लक्ष्य है।

