एसडीजी में बिहार की प्रगति उल्लेखनीय, अब ‘प्रोग्रेस से एक्सेलरेशन’ की ओर बढ़ने की जरूरत : डॉ. एन. विजयालक्ष्मी
पटना। बिहार सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) कॉन्क्लेव-2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयालक्ष्मी ने राज्य की एसडीजी यात्रा और विभिन्न क्षेत्रों में हासिल प्रगति को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को केवल वैश्विक लक्ष्य के रूप में नहीं, बल्कि बिहार की विकास नीतियों और योजनाओं को परिणामोन्मुख बनाने के महत्वपूर्ण ढांचे के रूप में देखा जा रहा है। एसडीजी-2030 की दिशा में हुई प्रगति को विकसित बिहार@2047 के दीर्घकालिक विजन से जोड़कर विकास की गति को और तेज करने की जरूरत है।
डॉ. विजयालक्ष्मी ने बताया कि बिहार के एसडीजी स्कोर में लगातार सुधार हुआ है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स के अनुसार राज्य का स्कोर 2018 में 48 था, जो 2023-24 में बढ़कर 57 हो गया। उन्होंने एसडीजी-6 यानी स्वच्छ जल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में बिहार की उपलब्धि का विशेष उल्लेख किया। इस क्षेत्र में राज्य ने 98 अंक हासिल कर देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह एसडीजी-9 यानी उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना के क्षेत्र में भी बिहार ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य का स्कोर 2020-21 में 24 था, जो 2023-24 में बढ़कर 53 हो गया। इस तरह इस अवधि में 29 अंकों का सुधार दर्ज किया गया।
दोहरे अंक की आर्थिक वृद्धि से बदल रही तस्वीर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बिहार की आर्थिक प्रगति भी राज्य के समग्र विकास की तस्वीर बदल रही है। राज्य लगातार कई वर्षों से दोहरे अंक की जीएसडीपी वृद्धि बनाए हुए है। वर्ष 2024-25 में वर्तमान कीमतों पर बिहार की जीएसडीपी वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत रही, जबकि इसी अवधि में देश की वृद्धि दर 9.8 प्रतिशत रही। उन्होंने बताया कि बिहार का प्रति व्यक्ति जीएसडीपी 2003-04 में 5,780 रुपये था, जो बढ़कर 2024-25 में 76,490 रुपये हो गया। इस प्रकार इसमें 13 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ सामाजिक विकास के संकेतकों में भी सुधार हो रहा है, जो राज्य की विकास रणनीति के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।बहुआयामी गरीबी में देश में सर्वाधिक कमी
बिहार की विकास यात्रा में बहुआयामी गरीबी में कमी को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए डॉ. विजयालक्ष्मी ने कहा कि वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच राज्य में बहुआयामी गरीबी में 18.13 प्रतिशत अंकों की कमी आई। यह देश में सबसे अधिक कमी है। इस अवधि में लगभग 2.25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। उन्होंने कहा कि गरीबी में कमी को केवल आय के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न आयामों में सुधार के संदर्भ में भी इसका आकलन होना चाहिए। यही एसडीजी का समग्र और समावेशी विकास दृष्टिकोण है।
स्वास्थ्य पर खर्च तीन गुना से अधिक बढ़ा
स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य सरकार के बढ़ते निवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकारी व्यय 2015-16 में 4,571 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 15,013 करोड़ रुपये हो गया। सेवा वितरण में सुधार, अस्पतालों के संचालन को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूत करने के प्रयासों का असर प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर भी दिखाई दे रहा है। बिहार में शिशु मृत्यु दर 2015 के 42 से घटकर 2024 में 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि मातृ मृत्यु दर के मामले में भी बिहार और राष्ट्रीय औसत के बीच का अंतर कम हुआ है। वर्ष 2014-16 में यह अंतर 35 अंकों का था, जो 2024 में घटकर नौ अंक रह गया।
1.75 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का कनेक्शन
जल सुरक्षा के क्षेत्र में बिहार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. विजयालक्ष्मी ने बताया कि हर घर नल का जल योजना के तहत सितंबर 2025 तक लगभग 1.75 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इसी प्रगति के कारण एसडीजी-6 में बिहार ने 98 अंक हासिल किए हैं और देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।ऊर्जा क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय सुधार किया है। बिहार में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 2011-12 के 134 किलोवाट से बढ़कर 2024-25 में 374 किलोवाट हो गई। वहीं बिजली क्षेत्र में एटी-सी हानियां 2013-14 के 42.99 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 15.54 प्रतिशत रह गईं। इन उपलब्धियों के परिणामस्वरूप एसडीजी-7 में बिहार का स्कोर 81 रहा।
महिला श्रम बल भागीदारी में बड़ा सुधार
महिला सशक्तीकरण को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बिहार में महिला श्रम बल भागीदारी दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017-18 में यह दर 4.4 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में एसडीजी-5 यानी लैंगिक समानता का स्कोर 24 से बढ़कर 44 हो गया। यानी इसमें 20 अंकों का सुधार हुआ है।
महिलाओं के वित्तीय समावेशन में भी बड़ी प्रगति हुई है। बिहार में स्वयं उपयोग किए जाने वाले बैंक या बचत खाते वाली महिलाओं का अनुपात 2015-16 में 26.4 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 90.9 प्रतिशत हो गया।
अब ‘प्रोग्रेस से एक्सेलरेशन’ की ओर बढ़ने का समय
डॉ. विजयालक्ष्मी ने कहा कि बिहार की एसडीजी यात्रा अब अगले चरण में प्रवेश कर रही है। अब राज्य को ‘प्रोग्रेस से एक्सेलरेशन’ की ओर बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एसडीजी-2030 और विकसित बिहार@2047 एक-दूसरे से जुड़े हुए लक्ष्य हैं।
उन्होंने कहा कि एसडीजी के माध्यम से वर्तमान विकास चुनौतियों का समाधान करते हुए दीर्घकालिक विजन के अनुरूप आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित एवं समावेशी बिहार का निर्माण किया जा सकता है। बिहार ने अब तक की प्रगति से इसके लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया है और आने वाले वर्षों में इसी आधार पर विकास की गति को और तेज किया जाना चाहिए।

