कोसी-मेची परियोजना से सीमांचल में सिंचाई का होगा विस्तार, किसानों की समृद्धि को मिलेगी नई गति:सीएम
सुपौल। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को जिले के छातापुर प्रखंड अंतर्गत चैनपुर गांव में निर्माणाधीन कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना स्थल का निरीक्षण किया।इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने चैनपुर स्थित परियोजना के कैंप कार्यालय में समीक्षा बैठक की। जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने परियोजना की कार्य प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया, जबकि जिलाधिकारी सावन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना सीमांचल और बिहार के लिए ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की समृद्धि को नई गति मिलेगी। परियोजना पूर्ण होने पर 2,14,813 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त एवं सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
परियोजना के तहत अररिया में 69,642 हेक्टेयर, पूर्णिया में 69,970 हेक्टेयर, किशनगंज में 39,548 हेक्टेयर तथा कटिहार में 35,653 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे सीमांचल के किसानों को खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।परियोजना के तहत पूर्वी कोसी मुख्य नहर की जल वहन क्षमता को 15,000 क्यूसेक से बढ़ाकर 20,000 क्यूसेक किया जाएगा। मुख्य नहर के विस्तार के साथ चार शाखा नहरों, छह वितरिकाओं तथा आवश्यक नहर प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना के अंतिम छोर पर लगभग 950 क्यूसेक पानी मेची नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित कुल लागत 6,282.32 करोड़ रुपये है और इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत कोसी के अधिशेष जल को लिंक नहर के माध्यम से मेची नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे बाढ़ के दौरान कोसी नदी के अतिरिक्त पानी के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान किसानों को कृषि कार्य में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने परियोजना में गति, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के साथ सभी संबंधित कार्यों की लगातार निगरानी करने को कहा। साथ ही कोसी और गंडक नदियों के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए समग्र योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने जल संसाधनों के संरक्षण और समुचित प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी के अधिशेष जल का समुचित उपयोग कर सीमांचल के खेतों तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि के साथ क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधायक नीरज कुमार बबलू, विधायक रामविलास कामत, विधायक देवांती यादव, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, जिलाधिकारी सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शरथ आर.एस. सहित अन्य अधिकारी एवं अभियंता मौजूद रहे।

