मप्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासियों को मिला राहुल गांधी का समर्थन
नई दिल्ली/भोपाल। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की दो नदियों को जोड़ने वाली प्रस्तावित केन-बेतवा नदी-लिंक परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों को समर्थन दिया है।उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में वे आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। वे इस मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहे आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आंदोलनकारी आदिवासियों के साथ बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं, विस्थापन, पुनर्वास और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राहुल गांधी के सामने रखा।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो साझा कर आंदोलन कारियों के संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अपने जायज हक की लड़ाई लड़ रहे बुंदेलखंड के निवासी सम्मान और समर्थन के हकदार हैं। राहुल ने भरोसा दिलाया कि आदिवासी परिवारों की इस लड़ाई में वे और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है।राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनके पुनर्वास, भूमि अधिकार और जबरन बेदखली के खिलाफ आवाज को संसद में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं खुद जमीन पर आकर आपके साथ आंदोलन में शामिल होऊंगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना गरिमापूर्ण पुनर्वास, वैकल्पिक आजीविका और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए, 2006) के पारदर्शी पालन के किसी भी परिवार को बेघर नहीं किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने राहुल को बताया कि केन-बेतवा परियोजना से पन्ना और छतरपुर जिले के बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो रहे हैं। प्रोजेक्ट के चलते आदिवासी समुदाय को विस्थापन और आजीविका से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। आंदोलन कारियों का दावा है कि कई परिवारों को भूमि के बदले भूमि और कानून के तहत मिलने वाले पुनर्वास अधिकार पर्याप्त रूप से नहीं मिले हैं।आंदोलनकारियों ने परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, प्रोजेक्ट के कारण बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र प्रभावित होगा और पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने ग्राम सभा की सहमति और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और अन्य दबाव का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर बुंदेलखंड में प्रभावित परिवारों और आंदोलनकारियों का विरोध लंबे समय से जारी है। अमित भटनागर सहित अन्य कार्यकर्ता विस्थापन, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर अलग-अलग चरणों में सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि उनके मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा।

