प्रदेश बीडीओ महासंघ के आह्वान पर बीडीओ ने काली पट्टी बांध किया काम
-संघ का अल्टीमेटम सुरक्षा नहीं मिली तो 27 जुलाई से शुरू होगा आंदोलन
सुगौली। बीते दिन छपरा में छात्र आंदोलन के दौरान विधि व्यवस्था का संधारण करने पहुंचे दो बीडीओ पर किये गए जानलेवा हमले का विरोध बीडीओ संघ ने जताया है।
लिहाजा बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलने पर 27 जुलाई से गैर-जरूरी सरकारी कार्यों का बहिष्कार किया है। बीडीओ नूतन किरण के काली पट्टी बांध विरोध जाहिर करते हुए कार्यालय के कामों को संपादित किया। संघ ने मुख्यमंत्री, बिहार सरकार को पत्र भेजकर बीडीओ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जबकि सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। संघ की ओर से 26 जुलाई 2026 को जारी पत्र के अनुसार 25 जुलाई को छपरा सदर में विधि-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान दृष्टि पाठक और रिविलगंज प्रखंड के बीडीओ रितेश कुमार गंभीर रूप से घायल हुए।
संघ के मुताबिक,घटना में एक अधिकारी की आंख की रोशनी चली गई है, जबकि दूसरे अधिकारी के सर पर पत्थर लगने से उनकी सर का खोपड़ी फ्रैक्चर होने से गंभीर रूप से घायल हैं । उनका इलाज पटना में उच्च स्तरीय अस्पताल में चल रहा है। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने मुख्यमंत्री के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं। संघ ने प्रत्येक बीडीओ कार्यालय में बॉडी प्रोटेक्टर,राइट हेलमेट,आर्म गार्ड सहित अन्य छः सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक बीडीओ के साथ ड्यूटी के दौरान कम से कम दो प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की स्थायी प्रतिनियुक्ति करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि सुरक्षा कर्मी सिर्फ विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में ही नहीं, बल्कि जनसुनवाई, क्षेत्र भ्रमण और अन्य सरकारी दायित्वों के दौरान भी बीडीओ के साथ रहने की मांग की है। संघ ने यह भी कहा है कि यदि विधि-व्यवस्था की स्थिति की सही तरीके से रिपोर्टिंग नहीं होने के कारण कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जवाबदेही जिलाधिकारी और उप विकास आयुक्त की तय की जाए।
छपरा की घटना के बाद बीडीओ की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने खड़े हुए सवाल अब आंदोलन की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। बहरहाल देखना होगा कि सरकार संघ की मांगों पर क्या कदम उठाती है और 27 जुलाई से प्रस्तावित विरोध को टालने के लिए क्या पहल करती है।

