चार महीने मांगलिक कार्य पर लगेगा विराम, नहीं बजेगी शहनाइयां, चातुर्मास का प्रारंभ
संग्रामपुर। 25 जुलाई से चार महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक। नहीं होगी शादी विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार या अन्य कोई शुभ कार्य। ऐसा इसलिए होगा कि 25 जुलाई से चातुर्मास का प्रारंभ होगा और भगवान विष्णु अपने ध्यान योग में शयन के लिए चले जाएंगे।
भगवान विष्णु 25 जुलाई से 20 नवंबर तक क्षीरसागर में शयन करेंगे। धर्म ग्रंथो के अनुसार 25 जुलाई को हरिशयनी एकादशी का व्रत है। इसी दिन से चतुर्मास का प्रारंभ हो जाता है, जो 4 महीने तक चलता है। संग्रामपुर के आचार्य मुकुल मनोहर पाण्डेय ने बताया कि इस अवधि में ब्रह्मांड का कार्यभार भगवान शिव के पास रहता है। इसी कारण चातुर्मास में शिव और शक्ति के साथ पितरों की पूजा की जाती है।
श्रावण और भाद्रपद मास में भगवान शिव की पूजा होती है तो वही आश्विन महीने में पितरों और भगवती दुर्गा की पूजा होती है। आचार्य ने बताया कि भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के कारण मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है इसलिए चातुर्मास में शुभ कार्य वर्जित कर दिया जाता है।
शादियों के लिए लग्न उपलब्ध नहीं हो पाता है, नए घरों में गृह प्रवेश नहीं हो सकता। मुंडन संस्कार या उपनयन संस्कार नहीं हो सकता। 20 नवंबर 2026 को देव उठवनी एकादशी के साथ ही पुनः रौनकता लौट जाएगी और सभी मांगलिक कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

