जीविका दीदियों की तकदीर बदल रही सिलाई मशीन
घोड़ासहन। जीविका द्वारा संचालित सिलाई केंद्र क्षेत्र की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। तीन जगहों पर 50 सिलाई मशीनो पर महिलाएं काम कर रही है। जानकारी के अनुसार अंश सीएफएल कदमवा, बापूधाम सीएफएल भेलवा और सम्राट सीएफएल बीरता चौक के समीप कुल 50 सिलाई मशीनें लगाकर सिलाई शुरू कर दिया गया है।
बीपीएम अतुल मोहन झा ने बताया कि प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए 14 हजार पोशाक बनाने की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को दी गई है।राज्य स्तर पर कक्षा 1 से 8 तक के सरकारी स्कूलों के बच्चों की ड्रेस बनाने का टेंडर भी जीविका को मिलने की संभावना है। एक दीदी रोजाना 20 सेट ड्रेस तैयार कर रही है। नतीजतन उन्हें प्रति सेट 55 रुपये मिलते हैं। इसमें दीदी को 50 रुपये और केंद्र को 5 रुपये मिलते है।
दीदियां इस काम को पूरे उत्साह और लगन के साथ कर रही हैं, फलू उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। जाहिर है कल तक फूटी-कौड़ी की मोहताज महिलाएं अब अच्छी खासी आमदनी करके आत्मनिर्भर बन रही है।

