ग्रामीण क्षेत्रों में कर लगाने का फैसला गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा : सुधाकर सिंह

ग्रामीण क्षेत्रों में कर लगाने का फैसला गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा : सुधाकर सिंह
Facebook WhatsApp

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने शनिवार को बिहार सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में कर लगाने के निर्णय की कड़ी आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और गरीब तथा निम्न आय वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने 15 जुलाई को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। उनका आरोप था कि यह निर्णय गांवों की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला है। इससे महंगाई, बेरोजगारी और सीमित आय से जूझ रहे ग्रामीण परिवारों पर नए कर एवं शुल्क लगाने से उनकी आर्थिक कठिनाइयां और बढ़ेंगी।

राजद सांसद ने कहा कि बिहार आज भी प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण आय जैसे कई प्रमुख आर्थिक मानकों पर देश के विकसित राज्यों से पीछे है। उनके अनुसार, नई व्यवस्था का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो ठेला, खोमचा, रेहड़ी, रिक्शा, टमटम, बैलगाड़ी, हाथगाड़ी तथा अन्य छोटे परिवहन एवं स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।सुधाकर सिंह ने कहा कि पंचायतों द्वारा लगाए जाने वाले कर और शुल्क का प्रभाव केवल करदाताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उनका दावा था कि इससे छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होगी, ग्रामीण बाजारों की क्रय शक्ति प्रभावित होगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 27 पंचायतों को कर लगाने का अधिकार अवश्य देती है, लेकिन यह अधिकार राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और अधिकतम दरों के अधीन है। इसलिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि इस प्रावधान का उपयोग ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय स्थानीय विकास के संतुलित साधन के रूप में किया जाए।

राजद सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि जिन सेवाओं के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क बहुत कम या निशुल्क है, वहां भी आम लोगों से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायतें मिलती रहती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भूमि की लगान रसीद, दाखिल-खारिज और अन्य सरकारी सेवाओं में कथित अनियमितताओं तथा अवैध वसूली की शिकायतें पहले से सामने आती रही हैं। ऐसे में पंचायत स्तर पर नए कर एवं शुल्क लगाने का अधिकार भ्रष्टाचार की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक ओर बड़े उद्योगपतियों के बैंक ऋण माफ किए जाते हैं, जबकि दूसरी ओर ग्रामीण जनता पर नए करों का बोझ डाला जा रहा है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह के वर्ष 2023 के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और सतत विकास के लिए ग्रामीण निकायों के अपने राजस्व स्रोत विकसित करना आवश्यक है।

पत्रकार वार्ता में अर्थशास्त्री, योजना आयोग के पूर्व सचिव तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट (एनआईएलईआरडी) के पूर्व महानिदेशक डॉ. संतोष मेहरोत्रा भी उपस्थित थे।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page