तुरकौलिया चौक पर अतिक्रमण हटाने के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा
-गंवई डाक्टर छत पर चढ़कर पेट्रोल डालकर दी आत्मदाह की धमकी
-प्रशासन ने काफी सूझ बुझ का परिचय देकर छत से उतारा
-न्यायालय के आदेश का पालन कराना प्रशासन की प्राथमिकताः एसडीएम
-सीओ ने कहाः सरकारी भूमि का मुआवजा नहीं देने का है प्रावधान
तुरकौलिया। तुरकौलिया चौक के समीप हाई कोर्ट के आदेश पर चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक अतिक्रमणकारी तथाकथित चिकित्सक अपने घर की छत पर चढ़कर पेट्रोल शरीर पर उड़ेल कर आत्मदाह की धमकी देने लगा। जाहिर है मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम के सामने उसने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
घटना तुरकौलिया चौक के पास की है, जहां लोक निर्माण विभाग की जमीन पर लंबे समय से करीब डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों द्वारा अतिक्रमण कर छतदार घर बनाकर आवासीत थे। मामले को लेकर हाई कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता अनीश आलम ने शिकायत दर्ज कराई थी, तत्पश्चात न्यायालय ने संबंधित जमीन को खाली कराने का आदेश दिया है। इसी आदेश के अनुपालन में तुरकौलिया के अंचलाधिकारी संतोष कुमार,बंजरिया सीओ रोहन रंजन सिंह पुलिस बल और जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई शुरू होते ही कथित ग्रामीण चिकित्सक डी. आलम अचानक अपने घर का दरवाजा बंद कर छत पर चढ़ गये। वह अपने साथ पेट्रोल का गैलन लेकर गया था। नतीजतन देखते ही देखते उसने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़क लिया। वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए प्रशासन को चुनौती देने लगा और मकान तोड़े जाने पर आत्मदाह करने की धमकी देने लगा। उसने अपने मकान के बदले मुआवजे की मांग भी रखी। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत समझाने का प्रयास शुरू किया गया।
काफी मशक्कत के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम छत पर पहुंची और युवक को शांत कर सुरक्षित नीचे उतारने में सफल रही। इस दौरान बड़ी अनहोनी टल गई। सीओ संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए मकानों के लिए किसी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं है। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश पर ही यह कार्रवाई की जा रही है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
हालांकि, अचानक हुई बारिश के कारण अतिक्रमण हटाने का काम फिलहाल रोक दिया गया है, जिसे बुधवार को पुनः शुरू किया जाएगा। वहीं सदर एसडीओ निशांत सिहारा ने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेवारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति इस कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

