ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हमेशा प्रासंगिक रहेगा: सुनील आंबेकर

ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हमेशा प्रासंगिक रहेगा: सुनील आंबेकर
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने मंगलवार को कहा कि भले ही दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की तरफ तेजी से बढ़ रही हो लेकिन ह्यूमन इंटेलिजेंस (एचआई) यानी इंसान की सोचने-समझने की शक्ति और भरोसे का मुकाबला नहीं किया जा सकता।सुनील आंबेकर दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के तत्वावधान में आयोजित ‘देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 12 लोगों को सम्मानित किया गया।

आंबेकर ने कहा, अभी तक जितनी भी तकनीकें आईं वे अधिकतर अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता देती थीं, लेकिन नया एआई हमारी राष्ट्रीय भाषाओं के साथ-साथ उन छोटी-छोटी बोलियों और लोकगीतों को भी संजो रहा है जिनकी अपनी कोई लिपि नहीं है। यह तकनीक अब हमारी भाषा और हमारी ही टोन में बात करेगी। उन्होंने सतर्क करते हुए कहा कि हमें तकनीक को देखकर ‘क्रेजी’ या उसके सामने ‘सरेंडर’ नहीं होना है बल्कि उसका उपयोग केवल अपनी सुविधा के लिए करना है।

देवर्षि नारद के संदेश को याद दिलाते हुए आंबेकर ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज के कल्याण के लिए ‘सार्थक सूचना’ देना है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत और भारतीय धर्म का सही स्वरूप वैश्विक मंच पर प्रकट होगा और देश निरंतर आगे बढ़ेगा।

आंबेकर ने कहा कि लोग दूसरों से तो आदर्श व्यवहार की उम्मीद करते हैं लेकिन खुद नियमों का पालन नहीं करते। लोग आजकल सीसीटीवी कैमरे को देखकर अपना व्यवहार बदल लेते हैं जबकि असली अनुशासन वह है जो बिना किसी कैमरे के भी बना रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की समस्याओं की जिम्मेदारी सभी को सामूहिक रूप से लेनी होगी।वरिष्ठ पत्रकार राहुल कंवल ने कहा कि एआई के इस दौर में पत्रकारिता का भविष्य सिलिकॉन वैली के एल्गोरिदम से नहीं, बल्कि भारत के ‘आदि पत्रकार’ देवर्षि नारद की कार्यप्रणाली से तय होगा। मशीनें डेटा और स्क्रिप्ट तैयार कर सकती हैं लेकिन वे मानवीय संवेदना, सहानुभूति और विवेक का स्थान नहीं ले सकतीं। उन्होंने कहा कि साधन भले ही बदल जाएं लेकिन पत्रकारिता का मिशन कभी नहीं बदलता।

राहुल ने कहा कि पत्रकारिता का सर्वोच्च उद्देश्य समझ का निर्माण करना, अज्ञानता को कम करना, समाज के विभिन्न हिस्सों को जोड़ना, नागरिकों को इस अत्यंत जटिल और खंडित दुनिया को समझने में मदद करना है। उन्होंने भविष्य के पत्रकारों के लिए ‘नारद कार्यप्रणाली’ पर आधारित 6 स्तंभ पर जोर दिया। इनमें यात्रा करना, सुनना, देखना-अवलोकन करना, पुष्टि करना, विश्वास करना और जनता की सेवा करना शामिल है।

इस मौके पर विजेताओं को एक शॉल, एक मोमेंटो और 11 हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित किया गया।

विजेताओं में उत्कृष्ट युवा पत्रकार- पूजा राणा (वरिष्ठ सह-संपादक, ऑप इंडिया), उत्कृष्ट स्त्री सरोकार / महिला संवेदना पत्रकारिता-गरिमा उप्रेती (संपादक, नो द नेशन), उत्कृष्ट ग्रामीण-पर्यावरण पत्रकारिता- हिमानी दीवान (सीनियर असिस्टेंट एडिटर, किसान तक), उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (यूट्यूब)- विमल त्यागी (पब्लिक मित्र), उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (एक्स)- मयंक बालियान (बालियान_एक्स), उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (इंस्टाग्राम)- मनोज्ञा तिवारी, उत्कृष्ट साहसिक पत्रकार- प्रभात रंजन मिश्रा (द पम्पलेट), उत्कृष्ट डिजिटल पत्रकार- नीरज कुमार दुबे (संपादक, प्रभासाक्षी), उत्कृष्ट पत्रकार प्रिंट- निहाल सिंह (डिप्टी चीफ रिपोर्टर, दैनिक जागरण), उत्कृष्ट पत्रकार टीवी- डॉ. राम किंकर सिंह (पीटीआई विडियो), उत्कृष्ट स्तंभकार- शाश्वत (पाणिग्राही) और उत्कृष्ट अभिनव पत्रकार -रामानुज शर्मा (समाचार संपादक, हिन्दुस्थान समाचार) शामिल रहे।इन विजेताओं का चयन निर्णायक मंडली ने किया था। इनमें ममता वर्मा (महानिदेशक, डीडी न्यूज़), राज किशोर (वरिष्ठ सलाहकार संपादक, अमर उजाला समूह), रोहित विश्वकर्मा (प्रबंध संपादक, एनडीटीवी इंडिया), ब्रजेश कुमार सिंह (समूह संपादक कन्वर्जेस, नेटवर्क 18), ऐश्वर्या पंडित मैनिजिंग डायरेक्टर, (आईटीवी नेटवर्क), हरीश चंद्र बर्णवाल (सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, ब्लू क्राफ्ट) शामिल थे।

इस मौके पर इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के पदाधिकारियों और पत्रकारिता जगत के कई दिग्गज मौजूद रहे।

anand prakash

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