पराली से निकलने वाला धुआं उत्तर भारत के लोगों में बढ़ा रहा उच्च रक्तचाप का खतराः एम्स

पराली से निकलने वाला धुआं उत्तर भारत के लोगों में बढ़ा रहा उच्च रक्तचाप का खतराः एम्स
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नई दिल्ली। उत्तर भारत में रहने वाले लोगों के लिए पराली का धुआं न सिर्फ फेफड़े बल्कि रक्त चाप (बीपी) को भी बढ़ा सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन से पता चला कि फसल अवशेष(पराली) जलाने से निकलने वाला धुआं उत्तर भारत में रहने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप का खतरा काफी बढ़ा सकता है।बुधवार को पत्रकार वार्ता में एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने बताया कि पराली के धुएं से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अपेक्षाकृत स्वच्छ क्षेत्रों में रहने वालों की तुलना में उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना लगभग 15 प्रतिशत अधिक पाई गई है।

डॉ. अंबुज रॉय ने बताया कि भारत में उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों की संख्या ने देशभर में होने वाली सभी संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों को भी पीछे छोड़ दिया है। अकेले हाइपरटेंशन से भारत में हर साल करीब 16 लाख लोगों की मौत हो रही है। डॉ. रॉय ने कहा कि भारत में करीब 30 करोड़ लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि यह एक गंभीर पब्लिक हेल्थ समस्या बन चुकी है।

डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण ज्यादातर मामलों में दिखाई नहीं देते, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में करीब 25 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 33 फीसदी वयस्क हाइपरटेंशन से प्रभावित हैं। यही वजह है कि देशभर में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाने की जरूरत है।

anand prakash

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