भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठनो की संयुक्त आंदोलन की तैयारी

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठनो की संयुक्त आंदोलन की तैयारी
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नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते तथा खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न मुद्दों के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) को पत्र लिखकर आपसी मतभेद भुलाने और न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर संयुक्त आंदोलन चलाने का प्रस्ताव दिया है।संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के संयोजक जगजीत सिंह डल्लेवाल और सह-संयोजक कुरुबुरु शांताकुमार की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक एकजुटता समय की आवश्यकता है। पत्र में दोनों संगठनों से साझा रणनीति बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन शुरू करने की अपील की गई है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ.) तथा बड़े कॉर्पोरेट घरानों के प्रभाव में केंद्र और राज्य सरकारें लगातार किसान-विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ऐसे व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे किसानों, खेत मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने पत्र में पंजाब सरकार की प्रस्तावित लैंड पूलिंग नीति का भी विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इस नीति को दोबारा लागू करने का प्रयास किसानों के हितों के खिलाफ है। ऐसे में भूमि, कृषि और व्यापार से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसान संगठनों को एक मंच पर आकर संघर्ष करना चाहिए।

पत्र के अनुसार, किसान संगठनों के बीच व्यापक एकता स्थापित करने के उद्देश्य से 25 जून और एक जुलाई को चंडीगढ़ में बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई और संयुक्त आंदोलन को लेकर सहमति बनाने की दिशा में प्रगति हुई है।उल्लेखनीय है कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) से डॉ. दर्शन पाल, राकेश टिकैत, हन्नान मोल्ला और बलबीर सिंह राजेवाल जैसे प्रमुख किसान नेता जुड़े हुए हैं। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) का नेतृत्व जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंढेर कर रहे हैं। अब किसान संगठनों की नजर इस बात पर है कि साझा आंदोलन के प्रस्ताव पर एसकेएम क्या रुख अपनाता है और दोनों संगठन भविष्य की रणनीति को लेकर किस प्रकार आगे बढ़ते हैं।

anand prakash

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