शराबबंदी में जब्त वाहन पर नहीं मिलेगी कोई राहत:पटना हाईकोर्ट
पटना। पटना हाई कोर्ट ने बिहार के शराबबंदी कानून के तहत वाहन जब्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि जब कानून में अपील का प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, तब सीधे रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती।न्यायाधीश मोहित कुमार शाह एवं न्यायाधीश अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने प्रयागध्वज यादव की याचिका खारिज करते हुए कहा कि संबंधित वाहन से 350.250 लीटर अवैध शराब की बरामदगी हुई है, जिससे प्रथम दृष्टया बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत गंभीर अपराध बनता है।
कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में धारा 56 के तहत वाहन जब्ती और नीलामी का प्रावधान है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा सार्वजनिक हित में लिया गया निर्णय उचित है।
मामले के अनुसार, कैमूर जिले के दुर्गावती थाना कांड संख्या 169/2024 में पुलिस ने गुप्त सूचना पर एक हुंडई वेन्यू कार से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की थी। वाहन याचिकाकर्ता प्रयागध्वज यादव के नाम पर पंजीकृत था, जिसे बाद में मोहनिया के एसडीएम ने जब्त कर नीलामी का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने वाहन को “जूम कार” के माध्यम से किराये पर दिया था और घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। साथ ही जब्ती आदेश को यांत्रिक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई।
वहीं, राज्य की ओर से अधिवक्ता प्रशांत प्रताप (जीपी-2) ने दलील दी कि भारी मात्रा में शराब की बरामदगी निर्विवाद है और शराबबंदी कानून के तहत वाहन की जब्ती पूरी तरह वैध है।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले में कई विवादित तथ्य हैं, जिनकी जांच अपीलीय मंच पर ही संभव है, न कि रिट क्षेत्राधिकार में। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अधिनियम की धारा 92 के तहत उपलब्ध अपील का सहारा नहीं लिया, इसलिए रिट याचिका विचारणीय नहीं है।

