वीरगंज के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण का कार्य शुरू, 13 साल बाद चला बुलडोजर
– 1200 से ज्यादा मकान प्रभावित
रक्सौल। वीरगंज (नेपाल) के त्रिभुवन राजपथ के अंतर्गत आने वाली वीरगंज की मुख्य सड़क (मेन रोड) के चौड़ीकरण का काम रविवार सुबह से शुरू हो गया। सड़क डिविजन कार्यालय हेटौंडा ने वीरगंज महानगरपालिका के समन्वय से राष्ट्रीय राजमार्ग मानक के अनुसार सड़क को दोनों ओर 25-25 मीटर तक विस्तारित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
करीब 13 वर्षों से विभिन्न कारणों से अटका उक्त परियोजना आखिरकार जमीन पर उतर गई। सड़क विभाग और महानगरपालिका की कुल 13 डोजर मशीनों (9 सड़क विभाग की और 4 महानगर की) के जरिए सुबह 5 बजे से ही सड़क के दोनों ओर आने वाले घर, भवन और अन्य संरचनाओं को हटाने का काम शुरू कर दिया। सड़क डिविजन कार्यालय के नायब सुब्बा राजकुमार अर्याल के अनुसार, चीनी मिल आवास क्षेत्र, पावरहाउस चौक, मुरली, माईस्थान, घंटाघर, आदर्शनगर और रजत जयंती चौक सहित कई स्थानों पर एक साथ अतिक्रमण हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जबतक पूरा क्षेत्र खाली नहीं हो जाता, यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
सड़क डिविजन कार्यालय हेटौंडा के प्रमुख गुरु अधिकारी के मुताबिक, गंडक चौक से नेपाल–भारत सीमा के मैत्री पुल तक 25-25 मीटर के दायरे में 29 सरकारी भवन और करीब 1200 निजी मकान आते हैं, जिन्हें हटाया जा रहा है।
इस अभियान में नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और वीरगंज महानगर की नगर पुलिस भी तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि अब तक बिना किसी बड़े विरोध के कार्रवाई जारी है। सुरक्षा एजेंसियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
वीरगंज महानगर के मेयर राजेशमान सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 फागुन 2081 को सरकार के पक्ष में फैसला दिए जाने के लगभग 13 महीने बाद अब इस फैसले का क्रियान्वयन शुरू हुआ है। अदालत ने घर मालिकों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिससे लंबे समय से चली आ रही कानूनी अड़चन खत्म हो गई। हालांकि, फैसले का पूर्ण पाठ देरी से मिलने और आधिकारिक पत्राचार की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो पाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का विस्तृत पत्र पिछले फागुन 24 को सार्वजनिक किया, जिसके बाद कार्रवाई तेज कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि साल 2069 (नेपाल संवत) में सरकार ने पहली बार सड़क के केंद्र से दोनों ओर 25-25 मीटर तक के क्षेत्र को खाली कराने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ करीब 1200 घर मालिक ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने मुआवजे की मांग के साथ सड़क विस्तार की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए थे। लंबे समय तक अदालत में सुनवाई टलती रहने के कारण परियोजना अधर में लटकी रही। अब अदालत के अंतिम फैसले के बाद वीरगंज के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग के चौड़ीकरण का रास्ता साफ हो गया है।

