असम विधानसभा चुनाव : प्रचार थमा, 9 अप्रैल को मतदान, मैदान में कुल 722 उम्मीदवार
गुवाहाटी। आसन्न 16वीं असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने जा रहे मतदान के मद्देनजर मंगलवार की शाम 5 बजे चुनाव प्रचार अभियान पूरी तरह से समाप्त हो गया। उम्मीदवार आगामी बुधवार को अनौपचारिक रूप से घर-घर प्रचार अभियान चला सकेंगे।इस बीच मतदान कर्मी बुधवार को अपने पोलिंग स्टेशनों की ओर रवाना होंगे। इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। दूर-दराज के पोलिंग स्टेशनों के लिए खासकर राज्य के पहाड़ी जिले डिमा हसाओ और कार्बी आंगलोंग जिलों के कुछ पोलिंग स्टेशनों के लिए मतदान कर्मी मंगलवार को ही रवाना हो गये। कारण वे आज रवाना होकर बुधवार तक अपने पोलिंग स्टेशन पर पहुंचेंगे।
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रचार अभियान में हिस्सा लिया। राज्य की सत्ताधारी पार्टी भाजपा की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया। जबकि, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा मध्य असम और ऊपरी असम में चुनाव प्रचार किया। वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोरव गोगोई समेत अन्य नेताओं ने भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पूरी ताकत झोंक दी।
इस बार के चुनाव में अंतिम समय में कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगाए गये आरोपों के मद्देनजर प्रचार के दौरान बयानों में मर्यादाएं भी तार-तार हो गयीं। दोनों ओर से बीते दो दिनों से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे चुनावी माहौल बेहद गर्म हो गया है।
चुनाव प्रचार अभियान के अंतिम दिन निर्धारित आदर्श आचार संहिता के नियमों के अनुसार शाम 5 बजे प्रचार अभियान का समापन हो गया। आज से कोई भी औपचारिक रूप से प्रचार अभियान नहीं चला सकता। इस बीच चुनाव प्रचार अभियान के अंतिम दिन सुबह से ही राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का माहौल उत्साहपूर्ण देखा गया।
विधानसभा चुनाव के लिए शासक और विपक्ष दोनों ही पक्ष मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए जोरदार प्रचार अभियान चलाते नजर आए। दिन-रात यह प्रचार अभियान जारी रहा। इस संदर्भ में, सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लिए व्यापक प्रचार किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता और स्टार प्रचारक मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए जोरदार प्रचार कर भाजपा की रणनीतियों को लोगों के सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को बरपेटा, होजाई और डिब्रूगढ़ समेत तीन सार्वजनिक सभाओं में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले भी एक अप्रैल को असम आकर चुनाव प्रचार में भाग ले चुके हैं। प्रधानमंत्री ने धेमाजी के गोगामुख और बिश्वनाथ के बिहाली में आयोजित दो चुनावी जनसभाओं में भाग लेकर दल के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया।
इसी तरह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने व्यापक प्रचार अभियान चलाया। इसी तरह अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी भरपूर प्रयास किया।
चुनाव प्रचार अभियान के बीच रविवार से असम की राजनीति में दो नाम सबसे अधिक चर्चित हो गए हैं। ये दोनों हैं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा। पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा कई देशों के पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए, जिसके बाद विवाद पैदा हो गया।
उल्लेखनीय है कि 16वीं असम विधानसभा के लिए 722 उम्मीदवार चुनाव में भाग ले रहे हैं। इनमें पुरुष उम्मीदवारों की संख्या 663 है और महिला उम्मीदवारों की संख्या 59 है। दल के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सबसे अधिक 99 सीटों पर और भारतीय जनता पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
इसी प्रकार आम आदमी पार्टी ने 18 सीटों , सीपीआई (एम) ने दो सीटों, असम गण परिषद ने 26 सीटों, एआईयूडीएफ ने 30 सीटों, बीपीएफ ने 11 सीटों, यूपीपीएल ने 18 सीटों, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने दो सीटों, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 22 सीटों, अपना जनता पार्टी ने दो सीटों, असम राष्ट्रीय परिषद ने 10 सीटों, भारतीय जनता परिषद ने चार सीटों, सीपीआई ने तीन सीटों, पीआई (एमएल) ने तीन सीटों, जन सुरक्षा पार्टी ने 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
इसी तरह से गोंडवाना लोकतांत्रिक पार्टी ने तीन सीटों, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 16 सीटों, नेशनल पीपल्स पार्टी ने दो सीटों, राइजर दल ने 13 सीटों, राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने 10 सीटों, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) ने चार सीटों, रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (रसिक भट्ट) ने एक सीट, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने 41 सीटों, द नेशनल रोड मैप पार्टी ऑफ इंडिया ने दो सीटों, विकास इंडिया पार्टी ने पांच सीटों और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 16वीं असम विधानसभा के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं।
असम की 126 विधानसभा क्षेत्रों में कुल मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 50 लाख 21 हजार 413 है। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 16 हजार 591 है, महिला मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 4 हजार 501 है और तीसरे लिंग के मतदाता 321 हैं।
इसके अलावा, असम के मतदाता सूची में नए तरीके से 1 लाख 64 हजार 48 लोगों को शामिल किया गया है और 1 लाख 774 लोगों का नाम हटाया गया है। दूसरी ओर, असम में 18-19 वर्ष आयु के मतदाताओं की संख्या 6 लाख 28 हजार 93 है, 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता 1 लाख 2 हजार 472 हैं और 100 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या 2 हजार 482 है।
इसके अतिरिक्त, राज्य का सबसे अधिक मतदाता वाला विधानसभा क्षेत्र दलगांव है। यहां 3 लाख 17 हजार 110 मतदाता हैं। इसके विपरीत, असम का सबसे कम मतदाता वाला विधानसभा क्षेत्र आमरी है। यहां 1 लाख 494 मतदाता हैं। इसके लिए असम में विधानसभा चुनाव के मतदान के दिन कुल 31 हजार 486 मतदान केंद्रों पर मतदाता मतदान करके आने वाले पांच वर्षों के लिए अपने जनप्रतिनिधि का चुनाव करेंगे।
चुनावों को सुचारू और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरे राज्य में सुरक्षा बलों की लगभग 200 कंपनियां तैनात की गयी हैं। राज्य और ज़िला सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है और चुनाव अवधि के दौरान सीसीटीवी निगरानी का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।
चुनाव आयोग के डाटा के अनुसार, राज्य में कुल 31,486 पोलिंग स्टेशन बनाए गये हैं। जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 27,711 और शहरी क्षेत्र में 3,775 हैं। महिलाओं द्वारा संचालित मतदान केंद्रों की संख्या 3,716 है। वहीं मॉडल पोलिंग स्टेशनों की संख्या 126 है। चुनाव आयोग के अनुसार शत-प्रतिशत वेब कास्टिंग की व्यवस्था की गयी है। मतदान केंद्रों पर चुनाव आयोग के द्वारा सभी तरह के आवश्यक इंतजाम किये गये हैं।
उल्लेखनीय है कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) गठबंधन 76 सीटें जीती थीं। इनमें भाजपा ने 60, असम गण परिषद ने 9 और यूपीपीएल ने 6 सीटें व एक अन्य ने जीती थीं। दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व वाले महागठबंधन 49 सीटें जीती थीं। इनमें कांग्रेस ने 29, एआईयूडीएफ ने 16 और सीपीआई(एम) ने एक सीट और चार सीटें निर्दलीय समेत अन्य ने जीती थीं।

