भारत-साइप्रस के बीच होगी रणनीतिक साझेदारी, निवेश भी होगा दोगुना

भारत-साइप्रस के बीच होगी रणनीतिक साझेदारी, निवेश भी होगा दोगुना
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ दोनों देशों के बीच व्यापक एवं भरोसेमंद साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने को लेकर शुक्रवार को व्यापक चर्चा की।एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद-विरोधी, समुद्री सुरक्षा, राजनयिक प्रशिक्षण, नवाचार, शिक्षा और संस्कृति सहित कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि चर्चा में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री और वित्तीय संपर्क, प्रौद्योगिकी और नवाचार, गतिशीलता, शिक्षा, संस्कृति और भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों जैसे विषयों को शामिल किया गया। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और साइप्रस के बीच 14 विषयों पर सहमति बनी है। दोनों देश अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में तब्दील करने पर सहमत हुए हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार मजबूत होगा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश सहयोग करेंगे।

आतंकवाद के खिलाफ दोनों देश संयुक्त कार्य समूह का गठन करेंगे। साइप्रस ने भारत की हिन्द-प्रशांत महासागरीय पहल में शामिल होने का फैसला किया है। भारत अत्याधुनिक स्वदेशी मोबाइल अस्पताल भीष्म क्यूब साइप्रस को उपहार स्वरूप देगा। दोनों देशों ने अगले 5 सालों के लिए रक्षा सहयोग का रोड मैप तैयार किया है।

दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा एवं शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सहयोग, नवाचार एवं तकनीक से जुड़े विषयों पर दोनों देशों के बीच में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। दोनों देश सर्च एवं रेस्क्यू क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे। दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा और राजनयिक संवाद की भी स्थापना की जाएगी। दोनों देशों ने 18 मई को भारत-साइप्रस स्पेस डे मनाया और इसके अलावा मुंबई में साइप्रस वाणिज्य केंद्र खोला गया है।

वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य दिया। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते भरोसे तथा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से नई संभावनाएं उभरी हैं और दोनों देश अगले पांच वर्षों में साइप्रस से भारत में होने वाले निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हुआ है, जो दोनों देशों के बीच बढ़े विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से नई आर्थिक संभावनाएं बनी हैं और इन्हीं अवसरों का लाभ उठाते हुए दोनों देश अगले पांच वर्षों में निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत और साइप्रस के संबंध समय की कसौटी पर बार-बार खरे उतरे हैं और रणनीतिक साझेदारी बनने से इन संबंधों को नया एम्बिशन और नई स्पीड मिलेगी। दोनों देशों ने संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए माइग्रेशन एवं मोबिलिटी समझौते तथा सामाजिक सुरक्षा समझौते पर सहमति बनाई है। इसके अलावा उच्च शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में भी समझौते किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूरोप के संबंध एक नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे समय में साइप्रस यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने के साथ-साथ भारत और पूरे यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण निवेश प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।

वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, भारत संघर्षों की शीघ्र समाप्ति और शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में त्वरित और महत्वपूर्ण सुधार भी आवश्यक हैं।

संयुक्त वक्तव्य में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा कि साइप्रस भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का समर्थन करता है। सुरक्षा परिषद में भारत को उचित स्थान मिलना चाहिए। हम साइप्रस की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के अटूट समर्थन पर धन्यवाद देते हैं।

उन्होंने कहा कि साइप्रस भारत और यूरोप के बीच एक विश्वसनीय, स्थिर और भरोसेमंद सेतु के रूप में कार्य करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है। यह सेतु यूरोपीय संघ, पूर्वी भूमध्य सागर और व्यापक मध्य पूर्व के बीच एक सेतु का काम करेगा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर में उनका दृढ़ विश्वास है कि यूरोपीय संघ और भारत के बीच साझेदारी और भी मजबूत होनी चाहिए। साइप्रस-भारत संबंध साझा ऐतिहासिक अनुभवों और समान मूल्यों पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध एक रणनीतिक दृष्टिकोण से अब एक ठोस साझेदारी में बदल रहे हैं। एक ऐसी साझेदारी जो सुरक्षा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, समुद्री सहयोग, शिक्षा और आर्थिक संपर्क सहित प्रमुख क्षेत्रों में पहले से ही ठोस परिणाम दे रही है।

उल्लेखनीय है कि साइप्रस के राष्ट्रपति चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत में है। वे इससे पहले मुंबई गए थे। कल उनका दिल्ली आगमन हुआ। आज उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page