माता शैलपुत्री का ही पार्वती के रूप में प्रादुर्भाव हुआ: प्रभा जी
– श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान शंकर-पार्वती की कथा सुन भाव विभोर हुए लोग
मोतिहारी। श्री रामचरितमानस यज्ञ एवं श्री राम कथा के चौथे दिवस का आज नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में कथा प्रारंभ हुआ। मानस सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कथा में वृंदावन धाम उरई आश्रम से पधारी हुई विदुषी कथा वाचिका भक्ति प्रभा जी ने कथा का प्रारंभ श्री राम नाम संकीर्तन से किया।
तत्पश्चात उन्होंने श्री रामचरितमानस के शिव विवाह प्रसंग की विषद् व्याख्या सामने रखीं। उन्होंने बताया कि दक्ष पुत्री सती का ही शैलपुत्री पार्वती के रूप में प्रादुर्भाव हुआ। माता पार्वती के जन्म के समय देवर्षि नारद का हिमवान के घर पहुंचना और माता पार्वती के हस्त रेखा देखकर उनके भविष्य का वर्णन करना परोक्ष रूप से श्रद्धा एवं विश्वास का एकात्म होने की पृष्ठभूमि थी।
माता पार्वती ने शिव को प्राप्त करने हेतु प्रचंड तपस्या और फिर भगवान शिव के द्वारा विवाह के लिए सहमति देना, इन दोनों ही घटनाओं का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण विवेचना की। कथावाचिका ने उसके बाद भगवान शिव के जगत प्रसिद्ध विवाह की अलंकारिक व्याख्या इतने सधे हुए अंदाज में रखी कि उपस्थित जनसमूह शिव की भक्ति में गोते लगाने लगे।
कथावाचिका के द्वारा श्रीराम कथा के तत्वसार के साथ मधुरमय भजन लोगों को भावविभोर कर दे रहा था। उक्त अवसर पर मानस सत्संग समिति के प्रो. राम निरंजन पांडेय, कामेश्वर सिंह, अवध किशोर दुबे, दिनेश कुमार, उमेश सिंह, संजय कुमार तिवारी, अनंत झा, जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, अनिवेश कुमार, चंद्रभूषण चैबे, भूप नारायण ओझा समेत सैकड़ो भक्त उपस्थित थे।

