दुष्कर्म मामले में एक को दस वर्षों का सश्रम कारावास
मोतिहारी। अनन्य विशेष न्यायालय रेप एंड पॉस्को के विशेष न्यायाधीश मिथिलेश कुमार ने एक किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने मामले में दोषी पाते हुए नामजद एक अभियुक्त को दस वर्षों का सश्रम कारावास एवं बीस हजार रूपये अर्थ दंड की सजा सुनाए है। अर्थ दंड नहीं देने पर पंद्रह दिनों की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
सजा मलाही थाना के मिश्रा टोला तेजपुरवा निवासी नूर आलम के पुत्र बुलेट आलम को हुई। वहीं पीड़िता को पीड़ित घोषित करते हुए विक्टिम कंपनसेशन स्कीम 2019 के तहत छह लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिए।
मामले में पीड़िता के लिखित आवेदन पर मलाही थाना कांड संख्या 11/2013 दर्ज हुई थी। जिसमें नामजद अभियुक्तों के अलावें दो नाबालिक भी नामजद किए गए थे। जिसमें कही थी कि 1 मार्च 2013 की संध्या 6.30 बजे अपने दोस्त से मिलने जा रही थी। उसी दौरान रास्ते में नामजद तीनों युवक घेर कर उसके साथ मारपीट किए तथा बगल के सरसों के खेत में ले जाकर बारी बारी से सामूहिक दुष्कर्म किए।
पुलिस ने 25 मई 2023 को प्राथमिकी में नामजद तीनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया था। पॉस्को वाद संख्या 44/2023 विचारण के दौरान विशेष लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने सात गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन साक्ष्य रखा। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद धारा 323,341,376(i),506 भादवि में दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाए।

