कृषि नीति और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़े: राष्ट्रपति

कृषि नीति और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़े: राष्ट्रपति
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें नीति निर्माण, निर्णय-निर्धारण तथा नेतृत्व पदों में अधिक अवसर मिलना चाहिए।महिलाओं की व्यापक भागीदारी से कृषि क्षेत्र में लैंगिक समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रपति गुरुवार को यहां ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन द रोल ऑफ वीमेन इन एग्री-फूड सिस्टम्स (जीसीडब्ल्यूएएस-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि की लगभग हर गतिविधि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के उपयोग और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन में भी लगातार योगदान दे रही हैं। महिलाएं कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अमूल्य योगदान देती हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक और अन्य विश्वविद्यालयों में 60 प्रतिशत से अधिक छात्राएं हैं, जो शैक्षणिक प्रदर्शन में भी उत्कृष्ट हैं। ऐसे में सरकार, समाज और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है कि इन प्रतिभाशाली छात्राओं को प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान किया जाए, ताकि वे कृषि और खाद्य उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें।

राष्ट्रपति ने कहा कि मातृत्व में नेतृत्व की भावना निहित होती है, लेकिन अक्सर इसे घर की सीमाओं तक ही सीमित मान लिया जाता है। इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को कृषि क्षेत्र में नेतृत्व देने के लिए आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ द वुमन फार्मर’ घोषित किया है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य मूल्य शृंखला में लैंगिक अंतर को कम करना और महिलाओं की नेतृत्व भूमिका को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं को भूमि के औपचारिक स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधनों और अन्य सहयोगी व्यवस्थाओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि पिछले दशक में भारत ने महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए कई पहल की हैं। महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने वाली पहलें इस दिशा में प्रभावी साबित हुई हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ‘पीपल, प्लेनेट, प्रॉस्पेरिटी, पीस और पार्टनरशिप’ को समान महत्व देने पर सहमति बनी है। ‘पीपल’ के आयाम में लैंगिक समानता को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कृषि सहित सभी क्षेत्रों में प्रभावी लैंगिक समावेशन से न केवल सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति होगी, बल्कि पृथ्वी को भी अधिक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण बनाया जा सकेगा।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कृषि में बहनों और बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीज बोने से लेकर कटाई, भंडारण तक हर चरण में महिलाएं अग्रणी हैं। आज हमारी बेटियां बड़ी संख्या में कृषि शिक्षा की ओर आगे बढ़ रही हैं। इसी दिशा में आईसीएआर शीघ्र ही एक जेंडर प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा रहा है, जो पूरे देश के कृषि अनुसंधान नेटवर्क में महिला-केंद्रित शोध को नई गति और दिशा देगा।

यह तीन दिवसीय सम्मेलन कृषि विज्ञान उन्नति ट्रस्ट, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह तथा पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी को मुख्यधारा में लाने और इस दिशा में नीति-ढांचे को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना है।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page