पी.एल.वी.न्याय व्यवस्था एवं जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु : जिला जज 

पी.एल.वी.न्याय व्यवस्था एवं जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु : जिला जज 
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– “पढ़ेगा पी.एल.वी. तो बढ़ेगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार”

मोतिहारी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार,  के सभा कक्ष में संस्था लॉ फाउंडेशन, पटना के सहयोग से 50 से अधिक पैरा लीगल वोलेंटियर (पी.एल.वी.) का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पी.एल.वी. को विधिक प्रावधानों, सामाजिक दायित्वों एवं व्यावहारिक कार्यप्रणाली के संबंध में सशक्त एवं दक्ष बनाने को लेकर आयोजित था, ताकि वे समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग तक प्रभावी ढंग से विधिक सहायता पहुंचा सकें।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश,  अभिषेक कुमार दास, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार नितिन त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित  कर किया गया।

उद्घाटन अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने  कहा कि पी.एल.वी. न्याय व्यवस्था और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। विधिक साक्षरता शिविरों के माध्यम से वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्तियों तक निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न छोटे-छोटे विवादों के समाधान में भी पी.एल.वी. की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिससे न्यायालयों पर अनावश्यक भार कम होता है। उन्होंने सभी पी.एल.वी. से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग जनहित में करें।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार नितिन त्रिपाठी ने  कहा कि “पढ़ेगा पी.एल.वी. तो बढ़ेगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार।”  पी.एल.वी. आम नागरिकों को कागजी कार्रवाई, आवेदन-पत्र दाखिल करने, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने तथा न्यायालयीन प्रक्रियाओं को समझने में सहयोग प्रदान करते हैं। यह कार्य अत्यंत जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता का है, जिसे समर्पण एवं सतत अध्ययन के माध्यम से ही प्रभावी बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षक सुनील झा ने महिला अधिकार, बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा संबंधित विधिक प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं अधिवक्ता संतोष कुमार ने घरेलू हिंसा, जेल मुलाकाती व्यवस्था, भरण-पोषण, साइबर क्राइम में जमानत की प्रक्रिया तथा नशामुक्ति जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया तथा उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर विधिक साक्षरता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पी.एल.वी. ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया तथा भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण सत्रों के आयोजन की आवश्यकता व्यक्त की।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह संकल्प लिया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मोतिहारी के माध्यम से विधिक सहायता एवं जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा, ताकि समाज के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

anand prakash

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