पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, दूग्ध उत्पादन में बिहार को बनाएं अग्रणी : मंत्री

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, दूग्ध उत्पादन में बिहार को बनाएं अग्रणी : मंत्री
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-सरकार की योजनाओं का उठाएं लाभ  
पीपराकोठी।  कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में तीन दिवसयीय कृषि मेला दुसरे दिन बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने पशुपालकों और किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि गाय को परिवार का हिस्सा बनाकर पालन करने से न केवल घर की ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि आने वाला समय भी सुरक्षित और समृद्ध बनता है। कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुपालन है। यदि हर किसान परिवार कम से कम एक-दो दुधारू पशु का पालन करे तो उसकी नियमित आय सुनिश्चित हो सकती है।

मंत्री ने बताया कि पशुपालकों के सहयोग और सरकार की योजनाओं के कारण राज्य में दुग्ध उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे किसानों की आय में इजाफा हुआ है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई नई डेयरी इकाइयों की स्थापना की गई है। दुग्ध संग्रहण केंद्रों का विस्तार किया गया है, फलस्वरूप गांव-गांव से दूध संग्रह कर उचित मूल्य पर विपणन सुनिश्चित किया जा सके।

इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पशुपालकों को सीधे लाभ मिल रहा है। उन्होने कहा कि पशुपालकों को नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशु टीकाकरण, चारा विकास और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी और ऋण की सुविधा देकर डेयरी व्यवसाय को प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होने पशुपालकों से अपील किया  कि वे आधुनिक डेयरी प्रबंधन अपनाएं, वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करें और राज्य को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

anand prakash

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