मोदी कैबिनेट ने बेतिया-साहेबगंज 4 लेन हाईवे की दी मंजूरी
पटना।बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने बिहार में एक नए हाइवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।इस प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग 130 डब्ल्यू के साहेबगंज-अरेराज-बेतिया खंड को फोरलेन हाइवे बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लंबाई 78.942 किलोमीटर है। इसमें कुल 3822 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस फोरलेन हाइवे के बन जाने से बेतिया से राजधानी पटना का सफर लगभग डेढ़ घंटे कम हो जाएगा।इस प्रोजेक्ट की मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में दी गई।
नई दिल्ली में इसकी जानकारी देते सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है,जिसका उद्देश्य राजधानी पटना और बेतिया के बीच संपर्क को बेतहर बनाने के साथ ही उत्तर बिहार के वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को जोड़ना है।
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्रो के साथ ही सीमा पार व्यापार व्यापक सुधार और वृद्धि होगी।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बेतिया-साहेबगंज फोरलेन बनने से 7 पीएम गति शक्ति आर्थिक नोड्स, 6 सामाजिक नोड्स, 8 लॉजिस्टिक नोड्स, 9 प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों को जोड़ेगी। इससे केसरिया बुद्ध स्तूप,(केसरिया),सोमेश्वरनाथ मंदिर (अरेराज),जैन मंदिर और विश्व शांति स्तूप (वैशाली) और महावीर मंदिर (पटना) सहित प्रमुख विरासत और बौद्ध पर्यटन स्थलों तक की पहुंच में सुधार होगा। इससे बिहार के बौद्ध सर्किट और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन क्षमता को मजबूती मिलेगी।
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एनएच-139 डब्ल्यू की योजना वैकल्पिक मार्गों को उच्च गति कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए बनाई गई है। यह एनएच-31, एनएच-722, एनएच-727, एनएच-27 और एनएच-227A के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क के रूप में काम करेगा।इसका डिजाइन 100 किमी प्रति घंटा की स्पीड से गाड़ियां चलाने के हिसाब से किया गया है। हालांकि, इस पर वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा की औसत गति से चलने की अनुमति रहेगी।
इससे साहेबगंज और बेतिया के बीच कुल यात्रा समय, मौजूदा विकल्पों की तुलना में 2.5 घंटे से घटकर 1 घंटा रह जाएगा। साथ ही यात्री और मालवाहक वाहनों के लिए सुरक्षित, तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी भी मिलेगी।उल्लेखनीय है,कि इस प्रोजेक्ट को पूरी करने की अवधि दो वर्ष निर्धारित किया गया है।

