पत्रकार और पत्रकारिता के अभाव में आदिम युग जैसा होगा हाल: प्रवीण बागी

पत्रकार और पत्रकारिता के अभाव में आदिम युग जैसा होगा हाल: प्रवीण बागी
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पटना। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि अगर पत्रकारिता न हो, तो आधुनिक समाज फिर से आदिम युग में चला जाएगा, जहां लोगों का समाज, देश और दुनिया की घटनाओं से कोई संपर्क नहीं रहेगा।मीडिया की अनुपस्थिति में न तो देश-दुनिया की अच्छी या बुरी घटनाओं की जानकारी मिल पाएगी और न ही आम नागरिक अपनी बात सरकार या समाज तक पहुंचा पाएंगे।

यह बातें उन्होंने विश्व संवाद केंद्र की ओर से आयोजित 12 दिवसीय पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता ने समाज में अपनी प्रतिष्ठा अर्जित की है, जो किसी सरकार या संगठन की कृपा से नहीं, बल्कि पत्रकारों के संघर्ष, निष्ठा और समर्पण के बल पर संभव हुई है।

प्रवीण बागी ने गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा संपादित पत्रिका ‘प्रताप’ का उदाहरण देते हुए पत्रकारिता की नैतिकता और समर्पण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संदेश दिया कि पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण पेशा है और इसमें प्रवेश करने से पहले सभी पहलुओं पर भली-भांति विचार कर लेना चाहिए। इस पेशे में नौकरी खोने या मीडिया हाउस बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए मानसिक तैयारी आवश्यक है।

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे पटना चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि पत्रकारिता का उपयोग राष्ट्र के सही इतिहास को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने में होना चाहिए और पीत पत्रकारिता से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजिव कुमार ने इस अवसर पर बताया कि यह कार्यशाला 2004 से लगातार आयोजित की जा रही है और यहां से निकले प्रतिभागी देश के प्रमुख मीडिया हाउसों में सफलतापूर्वक उच्च पदों पर कार्यरत हैं। समारोह में प्रतिभागियों द्वारा तैयार पत्रिका ‘सबरंग’ का भी विमोचन किया गया।

समापन समारोह में प्रतिभागियों ने 12 दिन के प्रशिक्षण में प्राप्त अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय में 2-3 वर्षों में पढ़ाई जाने वाली पत्रकारिता की शिक्षा का संक्षिप्त रूप यहां 12 दिनों में बिहार के अनुभवी पत्रकारों द्वारा कराई गई, जिसमें विशेष रूप से पत्रकारिता के व्यावहारिक आयाम पर जोर दिया गया।

anand prakash

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