लैड फाॅर जाॅब:लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश
लालू के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में शुक्रवार को आरोप तय करने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया और सरकारी नौकरी को सौदेबाजी का हथियार बनाते हुए जमीन हासिल की। न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट “गंभीर संदेह पर विस्तृत साजिश” का खुलासा करती है। उन्होंने यादव परिवार सहित आरोपियों द्वारा बरी किये जाने की याचिका को “अनुचित” बताते हुए खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि आरोप पत्र का विवरण अपराध का मूल तत्व संगठित रूप से दर्शाता है।
अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए और 52 लोगों को बरी कर दिया। सीबीआई ने अपनी सत्यापन रिपोर्ट में कहा था कि 103 नामजद आरोपियों
में से पांच की मौत हो चुकी है। अदालत ने 23 जनवरी को औपचारिक आरोप तय करने की तारीख निर्धारित की है।
सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियां देने के बदले उनकी जमीन ली गई थी। ये जमीन लालू यादव के परिवार और उनके करीबी लोगों के नाम कराई गई। हालांकि, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि चार्जशीट में नामजद 103
आरोपियों में से 5 की मौत हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती और उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर जोन) में ग्रुप डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई। यह जमीन लालू यादव के परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम कराई

