शिक्षा विभाग में 60.57 लाख के वेतन भुगतान घोटाले में पुलिस की जांच हुई तेज
-मदरसा के शिक्षक और एक डाटा ऑपरेटर पर एसपी ने रखा 10-10 हजार का इनाम
-फर्जी भुगतान में दो के अलावे कुछ और लोगो के संलिप्त होने के आसार प्रबल
-जांच को लेकर डीएम के सख्त आदेश पर विभाग में मचा हड़कंप
मोतिहारी । शिक्षा विभाग में करीब 60.57 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले की बात सामने आई है । ऐसे में इस घटनाक्रम से सरकारी महकमे में खलबली मच गई है।
बताते है कि सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से वेतन निकास करने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले को लेकर डीपीओ स्थापना के द्वारा नगर थाने में केस दर्ज कराई गई है। जिसमें मोतिहारी के आरोपी मदरसा शिक्षक और डाटा ऑपरेटर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने देर रात कई ठिकानों पर छापेमारी की। वहीं, पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने के लिए 10-10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।
आरोपियों के विरुद्ध पुलिस की लगातार छापेमारी जारी है।आरोपी डाटा ऑपरेटर अमन कुमार और मदरसा शिक्षक मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस अब बैंक खातों, एचआरएमएस रिकॉर्ड और वेतन भुगतान से जुड़े डिजिटल दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
उक्त मामले में अधिकारियों पर भी सवाल उठने लगे है और संभव है कि कुछ अधिकारियों के गिरेबां में पुलिस झाकेगी भी। लाजिमी है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया संवेदनशील होती है जिसमें विभागीय से लेकर प्रशासनिक स्तर के अधिकारी शामिल रहते हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस वर्ष 2024 से लेकर सितंबर 2026 तक हुए संदिग्ध वेतन भुगतानों की जांच का दायरा बढ़ा रही है। मुख्य रूप से मेकर, चेकर और अप्रूवल देने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। बताया गया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने फर्जी वेतन भुगतान में शामिल पाए जाने वाले मेकर, चेकर और अप्रूवल अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का निर्देश दिया है।
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ स्थापना की ओर से दोनों आरोपी कर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। गौरतलब होगा यह देखना कि फर्जी भुगतान की रकम किन-किन खातों में गई , जिससे इस फर्जीवाड़े की परतें खुलेंगी।
डीपीओ स्थापना कार्यालय के डाटा ऑपरेटर अमन कुमार और छौड़ादानो के मदरसा शिक्षक मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर का नाम अब तक इस मामले में सामने आया है। अलबत्ता डीईओ के अनुसार, दोनों कर्मियों ने एचआरएमएस प्रणाली में कथित छेड़छाड़ कर जून 2024 से सितंबर 2026 तक फर्जी तरीके से वेतन भुगतान कराया।
आरोप है कि मृत, दूसरे जिले में स्थानांतरित और सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम पर वेतन की राशि निकालकर पत्नी, पिता और बहन के बैंक खातों में भेजी गई जो रकम तकरीबन 60,57,158 है। ऐसे में इस कथित फर्जी भुगतान का दायरा बड़ा होने के भी आसार है।
प्रभात रंजन मुन्ना की रिपोर्ट

