धान की बाली में दूध भरने की स्थिति में करे पोटाश का छिड़काव:डा.आशीष
मोतिहारी। धान की फसल में दूध भरने की अवस्थाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं। इस समय खेत में पोटाश का छिड़काव करने से बालियों का समुचित विकास होता है और फसल की गुणवत्ता सुधार आता है।उक्त बाते डाॅ आशीष राय, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी, केविके परसौनी ने कही।
उन्होने कहा कि धान में बालियां व दुग्ध आने और भरने की अवस्था में पोटाश पौधे की पत्तियों से निर्मित स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट को बालियों तक तेजी से पहुंचाता है। इससे दाने ठोस, वजनी और चमकदार बनते हैं।साथ ही पोटाश पौधे के तने की कोशिकाओं को मजबूत बनाता है। तना मजबूत होने से पकने के समय तेज हवा या बारिश के बावजूद फसल खेत में गिरती नहीं है। उन्होने कहा कि इस अवस्था में पोटाश का उपयोग धान में लगने वाले विभिन्न फफूंदजन्य रोगों और कीटों के प्रति फसल की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है।
मौसम के तनाव से सुरक्षा
पोटाश पौधे के रंध्रों के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे कम पानी या सूखे की स्थिति में भी पौधा हरा-भरा बना रहता है। यदि मिट्टी में पोटाश की कमी है, तो 15 से 20 किग्रा प्रति एकड़ म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) का बुरकाव करें। त्वरित लाभ के लिए घुलनशील पोटाश NPK 0-0-50 (1 से 1.5 किग्रा प्रति एकड़) को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर शाम के समय ठंडे में या सुबह में धूप निकलने के बाद स्प्रे कर सकते हैं। पोटाश का छिड़काव कड़ी धूप में न करें।
बरते सावधानियां
यदि धान की फसल में 50% बालियां आ चुकी हैं, यानी यह बिल्कुल मिड-फ्लावरिंग का समय है तो इस समय पौधे में परागण की क्रिया बहुत तेजी से चल रही होती है।
इस नाजुक अवस्था में दवा या खाद का कोई भी छिड़काव न करें क्यूंकि इस समय धान के फूल खुले होते हैं। अगर अभी स्प्रे किया गया, तो फूलों का परागण बाधित हो जाएगा, जिससे बालियों में दाना नहीं भरेगा और वे खाली रह जाएंगी।जब बालियां पूरी तरह बाहर आ जाएं और उनके फूल झड़ जाएं यानी दाना दूधिया अवस्था में जाने लगे तब स्प्रे करना ठीक रहता है।

