कर्नाटक में भीषण सूखे पर कांग्रेस अध्यक्ष का प्रधानमंत्री को पत्र, तत्काल राहत की मांग

कर्नाटक में भीषण सूखे पर कांग्रेस अध्यक्ष का प्रधानमंत्री को पत्र, तत्काल राहत की मांग
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नई दिल्ली। कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल वित्तीय मदद की मांग की है।खरगे का दावा है कि कर्नाटक पिछले 150 वर्षों के सबसे गंभीर सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) से मांगी गई 3,705.30 करोड़ रुपये की राहत राशि बिना किसी कटौती के तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि कर्नाटक में सितंबर माह तक मानसून में 58 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे राज्य के सभी 31 जिले प्रभावित हुए हैं। 01 जून से 31 अगस्त के दौरान राज्य में सामान्य 691 मिमी के मुकाबले मात्र 477 मिमी बारिश हुई, जो पिछले 50 वर्षों में दूसरी सबसे कम वर्षा है। राज्य के कुल 240 तालुकों में से 217 में बारिश की भारी कमी है, जिनमें से 177 तालुकों को तीन चरणों में सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है और अन्य तालुकों का मूल्यांकन जारी है।खरगे ने कहा कि सूखे के कारण राज्य के 19.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि और बागवानी की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं, जिसमें 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि फसलें और 1.67 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलें शामिल हैं। फसलों को हुए नुकसान का आकलन 18,748.23 करोड़ रुपये किया गया है, जबकि राज्य को कुल मिलाकर करीब 40,000 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है।

खरगे ने अपने पत्र में जलाशयों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 31 अगस्त तक कर्नाटक के 13 प्रमुख जलाशयों में जलभंडारण क्षमता के मुकाबले काफी कम पानी बचा है। कावेरी बेसिन में भारी कमी है और बेंगलुरु को पेयजल आपूर्ति करने वाले कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध में केवल 64 प्रतिशत जल उपलब्ध है। पनबिजली जलाशयों में जलस्तर 61 प्रतिशत तक गिर जाने से 5,500 से 6,000 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन घटने की आशंका है, जिससे भूजल पंपिंग के लिए महंगी बिजली खरीदने का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर पड़ेगा।कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से मांग की कि 3 से 7 अक्टूबर के बीच राज्य का दौरा कर रही तीन अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों (आईएमसीटी) के अलावा गंभीर रूप से प्रभावित कल्याणा-कर्नाटक (हैदराबाद-कर्नाटक) क्षेत्र में जमीनी नुकसान का जायजा लेने के लिए तत्काल एक अतिरिक्त केंद्रीय टीम भेजी जाए।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक का लगभग 79 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र सूखा-संवेदनशील है और 77 प्रतिशत क्षेत्र शुष्क या अर्ध-शुष्क श्रेणी में आता है। राज्य की वार्षिक वर्षा का 74 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से मिलता है, जिसके विफल होने से राज्य के सभी दस कृषि-जलवायु क्षेत्रों में गहरा संकट पैदा हो गया है। कर्नाटक सरकार ने केंद्र को आपदा प्रबंधन मैनुअल 2020 के तहत विस्तृत ज्ञापन सौंपकर 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता की गुहार लगाई है, जिसे जल्द से जल्द जारी करने के लिए विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

anand prakash

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