मेहसी में तहफ़्फ़ुज़ ए ईमान कांफ्रेंस का हुआ आयोजन

मेहसी में तहफ़्फ़ुज़ ए ईमान कांफ्रेंस का हुआ आयोजन
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पूर्वी चंपारण। जिले के मेहसी प्रखंड के दामोदरपुर गांव स्थित मदरसा फ़ातिमा तूज्जोहरा लिलबिनात के तत्वावधान में रूहानी जलसा ‘तहफ़्फ़ुज़-ए-ईमान कॉन्फ्रेंस’ का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम,शायरे आजाम, हिफ़्ज़-ए-कुरआन करने वाले छात्र, नातख्वां शायर तथा आम मुसलमानों ने शिरकत की।

गुरूवार की रात से सजी महफ़िल नात, तकरीर और रूहानी माहौल की सरगर्मियों से शुक्रवार की सुबह तक गूंजती रही।मदरसा के बानी मुफ़्ती क़ुतुबुद्दीन रिज़वी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य दीन-ए-इस्लाम की तहफ़्फ़ुज़, इस्लाह-ए-मुआशरा और नई पीढ़ी को दीनी तालीम और सीरत की सही राह से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में बच्चों की दीनी तरबियत और नैतिक मजबूती समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

कॉन्फ्रेंस की सरपरस्ती पीर-ए-तरीक़त अलहाज जियाउल मुज्तबा कामिल ने की। अपनी रौशन-ए-दिल तकरीर में उन्होंने कहा कि दीन की असल ताक़त शरियत पर अमल और उम्दा अख़लाक में है। हर मुसलमान की जिम्मेदारी है कि वह अपने घर-परिवार और समाज में दीन की सही तालीम का वातावरण कायम करे। वहीं मुफ्ती गुलाम जिलानी अजहरी ने कुरआन और हदीस की रौशनी में मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि दीन को समझकर उस पर अमल करना आज पहले से कहीं ज़्यादा जरूरी हो चुका है।

उनकी तकरीर सुनकर महफ़िल में मौजूद लोगों पर खास असर देखने को मिला। शायर-ए-इस्लाम तौकीर इलाहाबादी ने अपने कलाम से महफ़िल को परवान चढ़ाया। उन्होंने फ़ातिमा के लालों का तज़किरा ज़रूरी है, गुंडागर्दी है जारी वक़्त के यज़ीदों की, दीन के लिए फिर से कर्बला ज़रूरी है। जैसे शायर सुना कर खुब तालियां बटोरी।

इसके अलावा मौलाना गुलाम गौस, मौलवी क़ौसर अली, रजाउल्लाह नक़्शबंदी, मौलाना रफ़ी अंजुम मन्नानी, तौकीर रज़ा इलाहाबादी, अजमत रज़ा और रज़ा हुसैन कलकतवी समेत कई उलमा और नातख्वां शायरों ने अपने कलाम पेश कर रूहानी माहौल को चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम के दौरान मदरसा से फ़ारिग़ होने वाली छात्राओं की दस्तारबंदी की गई। उलमा-ए-किराम ने उनकी इल्मी तरक्की, अमली कामयाबी और दीनी खिदमत के लिए दुआएं कीं। इस अवसर पर परिजनों और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल देखने को मिला।निजामत की जिम्मेदारी महबूब गौहर इस्लामपुरी और महबूब शबनम चम्पारणी ने निभाई।

कार्यक्रम का समापन मौलाना इमरान राजा, पैकर चम्पारणी, सैयद नूर बाबू समेत अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में दुआएं और सलाम के साथ हुआ।

anand prakash

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