किसानों के बीच रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक से अरहर की बुवाई का किया गया प्रत्यक्षण
डाॅ. आशीष राय, मृदा विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी ने दी जानकारी
मोतिहारी। कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के बीज उत्पादन प्रक्षेत्र में समूह अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण- दलहन के अंतर्गत आने वाले किसानों के लिये रेज्ड बेड प्लांटर से अरहर (किस्म: राजेन्द्र अरहर-1) की बुवाई का प्रत्यक्षण आयोजित किया गया।
इस दौरान किसानों को आधुनिक बुवाई तकनीक एवं इसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. अंशू गंगवार ने बताया कि खरीफ मौसम की दलहनी फसलों में अरहर प्रमुख फसल है तथा उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग से इसका उत्पादन और लाभ प्रदता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि रेज्ड बेड प्लांटर से बुवाई करने पर बीज की अनुशंसित मात्रा 8 किलोग्राम प्रति एकड़ का ही उपयोग होता है। अलबत्ता कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के द्वारा समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन दलहन प्रत्यक्षण करने वाले किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से खेतों में रेज्ड बेड प्लांटर मशीन से अरहर राजेन्द्र अरहर-1 प्रजाति की बुवाई का सजीव प्रदर्शन करके दिखाया गया।
इस दौरान मृदा विशेषज्ञ डाॅ. आशीष राय ने उपस्थित किसानों को मशीनी तकनीक अपनाने, संतुलित पोषण और सही फसल प्रबंधन के गुण सिखाए।
– रेज्ड बेड प्लांटर से बुवाई के प्रमुख फायदे
जलभराव से बचाव: बारिश के मौसम में खेत में पानी भरने पर अरहर के पौधे गल जाते हैं। मेड़ों पर बुवाई होने से अतिरिक्त पानी नालियों के जरिए बाहर निकल जाता है। बीज और खाद की बचत: मशीन के जरिए निश्चित दूरी पर गहराई में बीज और उर्वरक गिरते हैं, जिससे छिटुआ विधि की तुलना में 20-25% बीज की बचत होती है और बीज अंकुरण बेहतर होता है।
-जड़ों का समुचित विकास
मिट्टी के भुरभुरे और उंचे रहने से जड़ों को सही ऑक्सीजन मिलती है, जिससे फफूंद जनित रोगों का प्रकोप घटता है। लागत में कमी और अधिक उपज: कुंड और नाली बनने से खरपतवार नियंत्रण में आसानी होती है, जिससे श्रम लागत घटती है और उपज में 15–20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है।अरहर और रेज्ड बेड तकनीक से पोषक तत्वों के फायदे: अरहर की जड़ें में नोड्यूल बनती हैं और ये वातावरण में हवा में उपस्थित नाइट्रोजन को अवशोषित करती हैं जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है। रेज्ड बेड तकनीक से पर उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों के पास पहुंचता है, जिससे खाद का रिसाव नहीं होता और पौधा पूरा पोषण ग्रहण कर पाता है।
– संतुलित उर्वरक एवं फसल प्रबंधन
मृदा विशेषज्ञ ने अरहर की अच्छी पैदावार के लिए निम्नलिखित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। बताया कि बीज को नैनो डीएपी और राइजोबियम तथा पी एस बी कल्चर से बीजोपचार करें । नाइट्रोजन का उपयोग 15–20 किग्रा/हेक्टेयर शुरुआती वृद्धि के लिए जरूरी है। फास्फोरस का उपयोग 50-60 किग्रा/हेक्टेयर जड़ों के विकास के लिए मिट्टी में दें)। सल्फर का उपयोग 20 किग्रा/हेक्टेयर दाने में प्रोटीन व गुणवत्ता बढ़ाने के लिए करें। जिंक सल्फेट 25 किग्रा/हेक्टेयर की दर से करना चाहिये। कार्यक्रम में उपस्थित वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डाॅ अभय कुमार सिंह ने कहा कि किसानों ने रेज्ड बेड प्लांटर की कार्यप्रणाली को समझा और आधुनिक कृषि यंत्रीकरण तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई है।

