रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से संकट में ‘किसान मित्र’ बगुले

रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल से संकट में ‘किसान मित्र’ बगुले
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मोतिहारी। माॅनसून शुरू होने के साथ ही जिले में धान की बुआई तेज हो गई है। कहीं धान की रोपाई हो रही है तो कहीं खेत तैयार किए जा रहे हैं।इसी दौरान बड़ी संख्या में सफेद बगुले खेतों में उतरते दिखाई दे रहे हैं। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो हरे खेतों पर सफेद रंग की चादर बिछ गई हो। लेकिन इस सुंदर दृश्य के पीछे खेती और पर्यावरण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पक्ष भी छिपा है।

वर्षा के मौसम में इन खेतों में बड़ी संख्या में सफेद बगुले और अन्य कीटभक्षी पक्षी दिखाई देते हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खाकर प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसान इन्हें अपना ‘किसान मित्र’ मानते हैं।सफेद बगुले पूरे दिन खेतों में घूमकर सुंडी, टिड्डे, फुदके, विभिन्न हानिकारक कीटों और छोटे घोंघों जैसे जीवों को खाते हैं। इससे धान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या स्वाभाविक रूप से नियंत्रित रहती है और किसानों को लाभ मिलता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण में इन पक्षियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सफेद बगुले कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में एक मौन प्रहरी की तरह काम करते हैं।

हालांकि आधुनिक खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग ने इन पक्षियों के अस्तित्व पर चिंता बढ़ा दी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, कीटनाशकों के कारण खेतों में कीटों की संख्या कम होने से बगुलों के सामने भोजन का संकट पैदा हो रहा है। साथ ही जहरीले रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से इनके शरीर में भी पहुंच सकते हैं, जिससे केवल पक्षियों ही नहीं बल्कि पूरे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।उनके अनुसार, सफेद बगुले किसानों के सच्चे साथी हैं और यदि इनकी संख्या घटती है तो खेतों में कीटों का प्रकोप बढ़ जाएगा, जिससे पर्यावरण और कृषि दोनों को नुकसान होगा।

जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी किसानों को जैविक खेती तथा प्राकृतिक तरीकों को अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

केविके परसौनी के कृषि वैज्ञानिक डा. आशीष राय ने कहा कि कृषि में जैविक खाद के उपयोग पर विशेष जोर देने की जरूरत है।क्योकी प्राकृतिक तरीके से खेती करने से पर्यावरण सुरक्षित रहता है और भूमि की उर्वरता भी बढ़ती है।

वहीं वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। किसानों और आम लोगों को वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है।

anand prakash

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