बांकीपुर उपचुनाव से पहले जनसुराज को झटका, विधानसभा के कई पूर्व प्रत्याशी भाजपा में शामिल

बांकीपुर उपचुनाव से पहले जनसुराज को झटका, विधानसभा के कई पूर्व प्रत्याशी भाजपा में शामिल
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पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जनसुराज के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी नेताओं का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया और उन्हें संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने की शुभकामनाएं दीं।

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक एवं दीघा विधायक संजीव चौरसिया सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वालों में दीघा विधानसभा सीट से जनसुराज के पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह, कुम्हरार विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी प्रो. डॉ. केसी सिन्हा, मनेर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी गोपाल सिंह तथा पटना नगर निगम की पूर्व महापौर प्रत्याशी विनीता सिंह सहित कई अन्य नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. केसी सिन्हा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। बिहार को ज्ञान की भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने भाजपा में शामिल होने पर प्रदेश नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, केंद्र सरकार के कार्यों और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता बड़ी संख्या में भाजपा का दामन थाम रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नए सदस्यों के जुड़ने से पार्टी का संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा आगामी चुनावों में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले जनसुराज के कई प्रमुख नेताओं और पूर्व प्रत्याशियों का भाजपा में शामिल होना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे उपचुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है, जबकि भाजपा इसे अपने बढ़ते जनाधार और संगठन की मजबूती का संकेत बता रही है।

anand prakash

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