एसिड अटैक मामले में एक को आजीवन कारावास
मोतिहारी। 21वीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश रंजन ने चार महिलाओं पर एसिड अटैक कर गंभीर रूप से घायल कर देने मामले में दोषी पाते हुए नामजद अभियुक्त को आजीवन कारावास एवं दो लाख सत्रह हजार रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाए है।
अर्थ दंड नहीं देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं पीड़िता को बिहार प्रतिकर स्कीम के तहत पीड़ित घोषित करते हुए कंपनसेशन देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार को आदेश की प्रति भेजा है। साथ ही जिला कंपनसेशन कमिटी को पत्र भेजकर इसकी सूचना दी गई है।
सजा घोड़ासहन थाना के जगीरहां कोठी निवासी शिवमंगल प्रसाद यादव के पुत्र विजय कुमार यादव को हुई है। मामले में स्थानीय निवासी अभय सक्सेना की पत्नी रेणु देवी ने घोड़ासहन थाना कांड संख्या 56/2014 दर्ज कराते हुए अपने भैंसुर विजय कुमार यादव, उसकी पत्नी रेखा देवी, उसके ससुर राम विशवास राय व उसका साला अजय कुमार यादव सभी ग्राम बालापुर थाना घोड़ासहन को नामजद की थी। जिसमें कही थी कि 9 फरवरी 2014 के दोपहर वह अपने घर पर थी। उसी दौरान उसके भैंसुर विजय कुमार यादव एवं उनके तीन अन्य संबंधी हत्या करने के नियत से आये और उसके गले में रस्सी से फंदा लगाकर कसने लगे। उसके चिल्लाहट पर बचाने आई उसकी गोतनी संगीता देवी, वर्षा कुमारी एवं रिमझिम कुमारी को भी मारपीट किया गया।
इसी बीच सभी लोग एक साजिश के तहत तेजाब का बोतल लेकर आए तथा उसे पटककर उसके ऊपर डाल दिए, जिसके उसकी शरीर जलने लगी। साथ ही उसे बचाने आई उसकी गोतनी संगीता देवी, वर्षा कुमारी, रिमझिम कुमारी पर भी तेजाब डालकर जला दिए। गंभीर हालत में ग्रामीण उसे पीएचसी घोड़ासहन लाये, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हम तीनों घायलों की गंभीर स्थिति को देखकर चिकित्सक ने सदर अस्पताल मोतिहारी रेफर कर दिया।
वहां भी इलाज के बाद दूसरे दिन चिकित्सक ने गंभीर स्थिति को देखते हुए हम तीनों को पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया, जहां कई दिनों तक हम सभी का इलाज हुआ। घटना का कारण है कि सूचिका को कोई संतान नहीं है। नामजद लोग उसकी हत्या कर उसकी संपत्ति हड़प लेने के उद्देश्य से ऐसे कृत किए हैं। पुलिस ने चारों के विरुद्ध अलग-अलग आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया था।
अन्य तीन अभियुक्तों के वादों की सुनवाई अलग चल रही है। सत्रवाद संख्या 565/2014 विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक मो. मोइनुल हक एवं उनके सहायक अधिवक्ता पंकज कुमार ने तेरह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर गवाही कराई। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद नामजद अभियुक्त को दोषी पाते हुए धारा 326,307, 120बी, 353(3), 323, 342, 341/34 भादवि में दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाए।

