आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात था : जेपी नड्डा

आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात था : जेपी नड्डा
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पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से गुरुवार को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर बताया।उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर आघात था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि उस अवधि में लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था। आज देशभर में संविधान हत्या दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन बिहार और विशेष रूप से पटना का इस दिन से ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध है। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए आंदोलन की नींव बिहार की धरती पर पड़ी थी और उसी आंदोलन ने देश में लोकतांत्रिक चेतना को नई दिशा प्रदान दी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 5 जून 1974 को जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया था। उस समय वह स्वयं मैट्रिक के छात्र थे और आंदोलन के प्रत्यक्ष साक्षी रहे। उन दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तत्कालीन गफूर सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर राज्यपाल आर.डी. भंडारे को ज्ञापन सौंपने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे और उन्हें भी उस लोकतांत्रिक संघर्ष में शामिल होने का अवसर मिला था। वह आंदोलन केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन था।

नड्डा ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने पूरे देश में लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनभागीदारी की नई चेतना का संचार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के बढ़ते प्रभाव से घबराकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और लोकतंत्र समर्थकों पर व्यापक कार्रवाई की गई।

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान एक लाख 31 हजार से अधिक लोगों को विभिन्न कारणों से जेलों में बंद किया गया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लागू की गई और विरोध की आवाजों को दबाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, यह भारतीय लोकतंत्र के लिए अत्यंत कठिन और चिंताजनक कालखंड था।

जेपी नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि जनता की आवाज सुनने, विपक्ष का सम्मान करने और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने से होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सम्मान और नागरिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

नड्डा ने वर्तमान केंद्र सरकार की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और कुछ समय के लिए मणिपुर जैसी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अन्य राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनता के जनादेश के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जो दल इंडी गठबंधन के रूप में एक मंच पर दिखाई दे रहे हैं, उनका लोकतंत्र के प्रति दृष्टिकोण देश आपातकाल के दौरान देख चुका है। उन्होंने कहा कि आपातकाल का इतिहास लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं के महत्व की याद दिलाता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संविधान हत्या दिवस मनाने का उद्देश्य केवल इतिहास को स्मरण करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों को जागरूक करना भी है। उन्होंने युवाओं से संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के महत्व को समझने तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित नेताओं, कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र सेनानियों ने संविधान की गरिमा बनाए रखने, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, लोकतंत्र सेनानी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

anand prakash

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