खेत बचाओ अभियान: वर्मी खाद उत्पादन का किया गया सजीव प्रत्यक्षण
रामगढवा। खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों के बीच में जागरुकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में डाॅ आशीष राय, मृदा विशेषज्ञ, केवीके परसौनी ने वर्मी खाद उत्पादन के लिए वर्मी बेड के समुचित उपयोग की जानकारी दी।
कैसे बनायें केंचुआ खाद?
इस दौरान डा. आशीष राय ने बताया कि केंचुआ खाद एक जैविक उर्वरक है, जिसे केंचुओं की मदद से कृषि अपशिष्ट, गोबर और पौधों के अवशेषों को अपघटित करके तैयार किया जाता है। यह मिट्टी की सेहत सुधारने और फसलों की पैदावार बढ़ाने का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक तरीका है।
कैसे बनाये वर्मी कम्पोस्ट वर्मी
उन्होने बताया कि कम्पोस्ट बनाने के लिए आमतौर पर ‘बेड विधि’ को सबसे अच्छा माना जाता है।केंचुए की आइसीनिया फेटिडा प्रजाति के केंचुए सबसे उत्तम माने जाते हैं।इसके लिए गाय/भैंस का गोबर (कम से कम 30-40 दिन पुराना), सूखी पत्तियां, फसलों के अवशेष और कतरन।
अन्य सामग्री: टाट के बोरे (जूट की बोरियां), पानी छिड़कने के लिए हजारा और शेड (छायादार स्थान) जरूरी है।स्थान का चयन: हमेशा छायादार और ऊंचे स्थान का चुनाव करें जहाँ पानी जमा न होता हो। केंचुओं को सीधी धूप और बारिश से बचाना जरूरी है।
बेड तैयार करना: जमीन पर 3 से 4 फीट चौड़ी, 10 से 12 फीट लंबी और 1.5 से 2 फीट ऊंची क्यारी (Bed) बनाएं।पहली परत: वर्मी बेड के सबसे नीचे 3-4 इंच सूखी पत्तियां, घास या धान-गेहूं पुआल या भूसा की परत बिछाएं। इससे हवा का संचरण अच्छा रहता है।दूसरी परत: इसके ऊपर हल्का ठंडा और पुराना गोबर फैलाएं। (ध्यान रहे: ताजा और गर्म गोबर केंचुओं को मार सकता है)।केंचुए छोड़ना: गोबर बिछाने के बाद, प्रति वर्ग फुट के हिसाब से लगभग 100 केंचुए बेड के ऊपर छोड़ दें। वे खुद ब खुद नीचे चले जाएंगे।बेड को जूट की बोरियों से ढक दें और हर दिन हल्का पानी छिड़कें। बेड में 60-70% नमी और तापमान अनुकूल होना चाहिए।लगभग 60 से 90 दिनों में केंचुए ऊपरी परत को चाय पत्ती जैसी दानेदार खाद में बदल देते हैं। इस तैयार खाद को ऊपर से धीरे-धीरे इकट्ठा कर लें।
मिट्टी को होने वाले लाभ:
केंचुआ खाद मिट्टी के लिए एक “संजीवनी” की तरह काम करती है।मिट्टी की संरचना में सुधार: यह रेतीली मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाती है और चिकनी/भारी मिट्टी को भुरभुरा बनाती है।पोषक तत्वों की प्रचुरता: इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के अलावा सूक्ष्म पोषक तत्व भी होते हैं।वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी में फायदेमंद बैक्टीरिया और कवक की संख्या बढ़ाता है, जिससे मिट्टी जीवित बनी रहती है। यह मिट्टी के pH स्तर को संतुलित रखने में मदद करती है, जिससे मिट्टी न तो अत्यधिक अम्लीय होती है और न ही क्षारीय।
वही मौके पर डाॅ अंशू गंगवार ने किसानों को बताया की
किसानों के लिए वर्मीकम्पोस्ट आर्थिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में वरदान है: उन्होने बताया की इससे लागत में कमी भी आती है और रासायनिक खादों (जैसे यूरिया, डीएपी) पर निर्भरता कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है।खाद के प्रयोग से फसलों, फलों और सब्जियों का स्वाद, रंग और चमक बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।मिट्टी में नमी रोकने की क्षमता बढ़ने के कारण फसलों को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है।किसान वर्मीकम्पोस्ट और केंचुओं को बाजार में बेचकर एक बढ़िया और अतिरिक्त कमाई शुरू कर सकते हैं।इस खाद से पौधों की इम्युनिटी बढ़ती है, जिससे फसलों में कीड़े और बीमारियों का प्रकोप कम होता है।

