संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ के पूर्व तैयारियों की प्रभारी सचिव ने की समीक्षा, संबंधित पदाधिकारियों को दिए कई निर्देश
मोतिहारी। सचिव दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशु संसाधन -सह-प्रभारी सचिव, शीर्षत कपिल अशोक की अध्यक्षता तथा जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल एवं पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात की उपस्थिति में पीपराकोठी कृषि विज्ञान केंद्र में संभावित बाढ़, एवं सुखाड़ के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा की गई।
इस दौरान प्रभारी सचिव ने सभी विभागों को आपदा की किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने तथा जनहित में सभी आवश्यक एवं एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया।
सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने जानकारी दी कि जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र 24×7 कार्यरत है। जिले में वर्तमान में 20281 पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं। अतिरिक्त आवश्यकता की पूर्ति हेतु मुजफ्फरपुर से 5000 पॉलीथीन शीट्स की मांग की गई है। राहत शिविरों के संचालन के लिए 285 ऊंचे स्थलों का चयन किया जा चुका है। 165 निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा निष्पादित किया गया है। इसके अतिरिक्त 7 मोटरबोट,1 एसडीआरएफ टीम की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिले के सभी तटबंधों का संयुक्त निरीक्षण जिला प्रशासन द्वारा कराया गया हैं।
सांख्यिकी एवं जल संसाधन विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में वर्षामापक एवं ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन यंत्र क्रियाशील हैं। गंडक नदी, बूढ़ी गंडक नदी, लालबकेया नदी के तटबंधों की मरम्मत एवं बाढ़ सुरक्षा कार्य मुख्य अभियंता, के निर्देशन में कराया जा रहा है। प्रभारी सचिव ने सभी सिंचाई प्रणालियों को पूर्णतः सक्रिय रखने तथा तटबंधों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सुखाड़ की संभावित स्थिति के मद्देनजर कृषि विभाग द्वारा मानसून में विलंब अथवा कम वर्षा की स्थिति में मक्का, मडुआ, अरहर एवं धान की विशेष किस्मों जैसी वैकल्पिक फसलों का प्रस्ताव तैयार कर कृषि निदेशालय को भेजा गया है।
अनावृष्टि की स्थिति में बिचड़ों की सुरक्षा हेतु नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। स्वास्थ्य विभाग संभावित महामारी की रोकथाम हेतु 364 प्रकार की दवाओं एवं आवश्यक चिकित्सा सामग्रियों का भंडारण किया है। सदर अस्पताल में सर्पदंश एवं कुत्ता काटने की दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के लिए 45 राहत शिविर स्थल चिन्हित किए गए है। चलंत पशु चिकित्सा दल का गठन किया गया है। विद्युत विभाग को तेज हवा के दौरान ढीले तारों के कारण संभावित आगलगी की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र करने एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
वन विभाग को अभ्यारण्यों एवं उद्यानों में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराने, जल संरक्षण हेतु गड्ढों का निर्माण करने तथा पिंजरों को शीतल बनाए रखने के निर्देश दिए गए। जिला अग्निशमन पदाधिकारी को आगलगी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा भीड़-भाड़ वाले स्थलों पर नियमित अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्देश दिया गया। जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया सहित रेडियो एवं एफएम चैनलों के माध्यम से लू, बाढ़, सुखाड़, पराली दहन एवं आगलगी से बचाव संबंधी जनजागरूकता अभियान व्यापक स्तर पर संचालित करने का निर्देश दिया गया।
अंत में प्रभारी सचिव ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूरा करने तथा आमजन की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। वहीं अंचलाधिकारियों को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षण देने का निर्देश भी दिया गया। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी सदर निशांत सिहारा, विशेष कार्य पदाधिकारी अमरेश कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, सिकरहना तटबंध, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल तथा जल निस्सरण प्रमंडल के सभी अभियंता, जिला पशुपालन पदाधिकारी सहित जिले के सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

