सिकरहना नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि जारी
सुगौली। शहर से होकर गुजरने वाली सिकरहना नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। नतीजतन नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर पूर्वी चंपारण के इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। नदी का पानी तेजी से बढ़ने के कारण सुकुल पाकड़,दक्षिणी मंसिघा, करमवां सहित कई गांवों के लोगों में भय और चिंता का माहौल है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि राहत एवं बचाव कार्यों की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दीगर है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को देखते हुए स्थानीय लोगों में प्रशासनिक तैयारियों को लेकर संशय बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद राहत सामग्री,सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था और नाव जैसी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती हैं, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नेपाल में लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में सिकरहना नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन की तैयारियों और सतर्कता की असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हजारों लोगों को बाढ़ की गंभीर मार झेलनी पड़ सकती है।

जबकि लालपरसा धुमनी टोला स्थित सिकरहना नदी पर बने नए बांध की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार तीन-चार दिनों की बारिश के बाद बांध के कई हिस्सों में दरारें पड़ने, मिट्टी धंसने और संरचना कमजोर होने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई, जिसका नतीजा यह है कि बाढ़ आने से पहले ही बांध की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।

