उत्तराखंड में यूसीसी के तहत पहले हलाला केस में चार्जशीट दाखिल

उत्तराखंड में यूसीसी के तहत पहले हलाला केस में चार्जशीट दाखिल
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हरिद्वार। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद हलाला से जुड़े एक मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह राज्य का पहला मामला है, जिसमें यूसीसी के बाद हलाला के मामले मे चार्जशीट दाखिल की गई है।इस मामले मे अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

दरअसल, करीब दो महीने पहले एक महिला ने अपने पति दानिश और ससुराल पक्ष के अन्य पांच लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हु जिले के बुग्गावाला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी।

महिला का आरोप था कि शादी के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के साथ हलाला (निकाह हलाला) के लिए मजबूर किया गया। शिकायत में तीन तलाक से जुड़े आरोप भी शामिल थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस ने इस केस में समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड 2024 (संशोधन 2026) के तहत कार्रवाई की है। ये धाराएं हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय बनाती हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 115(2) और धारा 85, मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 2019 की धारा 3 और 4, तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 भी मुकदमे में जोड़ी गई हैं।

जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। विवेचना उपनिरीक्षक मनोज कुमार द्वारा की गई। जांच पूरी होने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में महिला के शौहर व मुख्य आरोपित दानिश के अलावा मोहम्मद अरशद, परवेज, जावेद और गुलशाना के नाम भी शामिल हैं।

इस संबंध में एसपी देहात हरिद्वार शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि मामला करीब दो महीने पहले दर्ज किया गया था और अब जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मुकदमे में शामिल धाराओं में गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं होने के कारण किसी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है। आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार होगी।

उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा यह पहला मामला माना जा रहा है, इसलिए इसे राज्य में समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

anand prakash

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