हरी खाद व संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन

हरी खाद व संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन
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पीपराकोठी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा बुधवार को जिले के चकिया प्रखंड अंतर्गत घनश्याम पकड़ी गाँव में हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में कुल 50 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 34 पुरुष एवं 16 महिला किसान शामिल थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को सतत् मृदा प्रबंधन, पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

विशेषज्ञों ने हरी खाद की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी देते हुए कैंचा, सनई एवं मूंग जैसी फसलों के महत्व पर प्रकाश डाला। किसानों को बताया गया कि दलहनी फसलें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मृदा की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि हरी खाद के प्रयोग से मृदा की संरचना में सुधार होता है, कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है तथा मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और दीर्घकालीन रूप से कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। कार्यक्रम के दौरान संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया।

किसानों को सलाह दी गई कि वे मृदा परीक्षण एवं फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें, जिससे पोषक तत्वों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह पद्धति उत्पादन लागत को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं मृदा की दीर्घकालिक उत्पादकता बनाए रखने में भी सहायक है।

कार्यक्रम में डॉ. संजीव कुमार, प्रमुख फसल अनुसंधान प्रभाग की टीम ने किसानों को सतत् कृषि पद्धतियों की आवश्यकता एवं लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. अभिषेक कुमार, वैज्ञानिक, संजय कुमार, तकनीकी सहायक तथा डा अर्पिता, वस्तु विषय विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों एवं संतुलित पोषण प्रबंधन के संबंध में उपयोगी जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग से संबंधित व्यावहारिक एवं लाभकारी जानकारी प्राप्त हुई, जो भविष्य में उनकी खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर किसानों के बीच 80 किलोग्राम ढँचा बीज का वितरण भी किया गया।

anand prakash

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