गेहूं के भूसे की बढ़ी भारी मांग,12 से 14 हजार रुपये प्रति ट्रेलर बिक रहा भूसा
-मुवेशी पालक पशुओं के चारा को लेकर चिंतित
हरसिद्धि। प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष गेहूं की फसल से ज्यादा गेहूं के भूसे की मांग तेज हो गई है। हालात ऐसे हैं कि जहां पहले किसान गेहूं की उपज को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब पशुपालकों के लिए भूसा सबसे जरूरी संसाधन बन गया है। बढ़ती मांग के कारण भूसे की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रही है।
वर्तमान में भूसा 12 हजार से 14 हजार रुपये प्रति ट्रेलर तक बिक रहा है, जबकि स्थानीय स्तर पर 500 रुपये प्रति कट्ठा तक इसकी बिक्री हो रही है। जानकारी के अनुसार, हरसिद्धि थाना क्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ों छोटी-बड़ी गाड़ियां साइकिल, ठेला और ट्रैक्टर के माध्यम से रामगढ़वा और नेपाल सीमा क्षेत्र की ओर भूसा ले जाते देखा जा रहा हैं। स्थानीय पशुपालक शिवजी प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने एक कट्ठा भी गेहूं की खेती नहीं की, लेकिन उनके पास दो गाय हैं, जिनके लिए चारे की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने बताया कि मजबूरी में उन्हें 12 हजार रुपये प्रति ट्रेलर की दर से भूसा खरीदना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आज इंसानों के लिए अनाज मिलना आसान है, लेकिन पशुओं के लिए चारा जुटाना काफी कठिन है।किसानों का कहना है कि बढ़ती कृषि लागत, मौसम की अनिश्चितता और कम मुनाफे के कारण इस बार गेहूं की बुवाई कम हुई है।
इसका सीधा असर भूसे की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे बाजार में इसकी किल्लत हो गई है। परिणामस्वरूप, पशुपालकों को महंगे दामों पर भूसा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पशुपालन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, प्रखंड क्षेत्र में भूसा “सोने से महंगा” साबित हो रहा है और इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

