सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगेगी रोक
-सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति के बाद गैर व्यावसायिक भत्ता को लेकर जारी होगा दिशा-निर्देश
पटना। नीतीश सरकार ने सात निश्चय-3 के प्रावधानों को लागू करने की पहल तेज कर दी है। सरकार ने इसके तहत सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है। सरकार की सहमति के बाद स्वास्थ्य महकमा ने शनिवार को इस आशय का संकल्प जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के तहत कार्यरत बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, बिहार चिकित्सा सेवा संवर्ग तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों तथा चिकित्सक शिक्षकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगा दी गयी है।
संकल्प के अनुसार सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बाद सरकारी चिकित्सकों को गैर व्यावसायिक भत्ता (एनपीए)/ प्रोत्साहन दिये जाने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा। गौरतलब है कि नीतीश सरकार ने सात निश्चय-3 के पांचवें निश्चय सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन की अवधारणा को अगले पांच वर्षों में धरातल पर उतारने का फैसला किया है। इसके तहत सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए सरकार नीति लाने वाली थी। सरकार ने इस आशय से जुड़े संकल्प को जारी कर इसे लागू कर दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान भी सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही सात निश्चय-3 के पांचवें निश्चय के तहत प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र तथा जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने, नये मेडिकल कॉलेजों में बेहतर पढ़ाई एवं इलाज के लिए लोक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित देने की योजना है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा की सुनिश्चितता के लिए चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था की सुनिश्चितता को शामिल किया गया है।
दरअसल, नीतीश सरकार के 20 वर्षों के शासन में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, महिला सशक्तीकरण तथा नौकरी और रोजगार की उपलब्धता फोकस में रही। इससे राज्य के सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। बिहार अब अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की ओर अग्रसर है।

