श्रीराम प्रकटोत्सव के भावपूर्ण सजीव चित्रण की भक्ति सागर में गोते लगाते रहे श्रोता 

श्रीराम प्रकटोत्सव के भावपूर्ण सजीव चित्रण की भक्ति सागर में गोते लगाते रहे श्रोता 
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– श्रीरामकथा यज्ञ में कथावाचिका भक्ति प्रभा जी ने किया अलौकिक राम जन्म की व्याख्या 

मोतिहारी। नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में मानस सत्संग समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा यज्ञ के पांचवे दिवस का कथा प्रारंभ करते हुए कथावाचिका भक्ति प्रभा जी ने अलौकिक राम जन्म प्रसंग की बड़े ही भावपूर्ण ढंग से व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया की निर्गुण निराकार पर ब्रह्म परमेश्वर भगवान श्रीराम का सगुण रूप में अवतार लेने लेने की कई कारण शास्त्रों में बताया गया है।

जिसमें जय- विजय जैसे भागवत पार्षदों को सनकादिक मुनियों के शाप से मुक्ति दिलाने के लिए अदिति कश्यप के वरदान पूर्ण करने के लिए, भानुप्रताप को शाप से मुक्त करने के लिए, देवर्षि नारद के वचनों को पूरा करने के लिए और मनु सतरुपा के तप के फल के रूप में आदि अनेक कारण बताए गए हैं।

किंतु गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि मेरे समझ से उस कृपालु दयालु परमात्मा राम के अवतार लेने का एक ही कारण रहा, वह था अपने भक्तों को आनंद प्रदान करना है। तत्पश्चात उन्होंने अवध में दशरथ कौशिल्या के गृह में राम के प्रकटोत्सव का भावपूर्ण सजीव चित्रण करके भक्ति में डूबे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर मानस सत्संग समिति के प्रो. राम निरंजन पांडेय, प्रो. सुरेश चंद्र, कामेश्वर सिंह, अवध किशोर द्विवेदी, उमेश सिंह, संजय कुमार तिवारी, अनिवेष कुमार, अनंत झा, जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, चंद्रभूषण चौबे, उमाशंकर पांडेय, भूपनारायण झा समेत सैकड़ो राम भक्त उपस्थित रहे।

anand prakash

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