मैट्रिक परीक्षा में स्टेट टाॅपर पुष्पांजलि बनना चाहती है साइंस्टिट

मैट्रिक परीक्षा में स्टेट टाॅपर पुष्पांजलि बनना चाहती है साइंस्टिट
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बांका। जिले के सिंहनान पंचायत के छोटे से गांव गोपालपुर निवासी शिक्षक लालमोहन शर्मा की पुत्री पुष्पांजलि कुमारी ने मैट्रिक परीक्षा में पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है।पुष्पांजलि ने 492 अंक प्राप्त कर 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किया है। रविवार को मैट्रिक परीक्षा का परिणाम घोषित होते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

शिक्षक लालमोहन शर्मा की सबसे छोटी पुत्री पुष्पांजलि कुमारी जमुई सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पढ़ाई कर रही थी। पुष्पांजलि अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी है। उनकी एक बड़ी बहन जीएनएम की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है।

दूसरी बहन बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। उनका भाई जेईई मेंस की तैयारी कर रहा है। परिवार में शिक्षा का माहौल होने के कारण पुष्पांजलि को भी पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहन मिलता रहा।

10 से 12 घंटे करती हैं पढ़ाई

अपनी सफलता का श्रेय पुष्पांजलि ने अपने पिता लालमोहन शर्मा, माता सिंधु देवी और अपने गुरुजनों को दिया है। उन्होंने बताया कि इस सफलता के पीछे नियमित 10 से 12 घंटे की पढ़ाई और अनुशासन सबसे बड़ा कारण रहा।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान उन्होंने कभी मोबाइल या इंटरनेट मीडिया का उपयोग नहीं किया। उन्होंने बताया कि सिमुलतला विद्यालय में भी मोबाइल रखना प्रतिबंधित है, जिससे पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलता है।

बनना चाहती हैं सांइटिस्ट

पुष्पांजलि ने बताया कि आगे चलकर वह साइंटिस्ट बनना चाहती है और देश की सेवा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और गणित विषय में उनकी विशेष रुचि है और इसी क्षेत्र में वह अपना करियर बनाना चाहती है।

उन्होंने बताया कि वह शुरू से ही टॉपर बनने का सपना देखती थीं और इसके लिए लगातार मेहनत करती रहीं। सेल्फ स्टडी पर विशेष ध्यान देने से उन्हें यह सफलता मिली।

पुष्पांजलि की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत अनुशासन और परिवार का मजबूत सहयोग रहा है। उनके पिता लालमोहन शर्मा मैथ्स के टीचर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई की नींव खुद रखी थी। कक्षा एक से पांच तक खुद अपने ही सरकारी विद्यालय में पढ़ाया।

इसके बाद बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन के लिए उसे सिमुलतला भेजा गया। उन्होंने कहा कि आज उनकी बेटी ने जो उपलब्धि हासिल की है वह पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है।

anand prakash

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