घोड़ासहन प्रखंड निर्माणाधीन दो पोखर एवं स्टेडियम का विभागीय निदेशक व डीएम ने किया निरीक्षण
-निविदा प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का निर्देश 1 करोड़ 8 लाख की लागत से निर्मित होगा पोखर का कार्य
मोतिहारी। पर्यावरण संरक्षण व जल संचयन को लेकर पुर्णोद्धार एवं सामुदायिक विकास की दिशा में उठाये गए कदम के तहत घोड़ासहन के दो पाखरो का निरीक्षण उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार एवं जिलाधिकारी ने किया। अधिकारी द्वय ने पोस्ट ऑफिस स्थित पोखरा एवं शशि भूषण दास मठ परिसर स्थित पोखरा का निरीक्षण किया।
इसके अतिरिक्त घोड़ासहन बाजार के मध्य में ऑडिटोरियम सह पुस्तकालय निर्माण स्थल का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दोनों पोखरों के व्यापक जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यकरण से संबंधित निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि पोस्ट ऑफिस के समीप पोखरा के लिए 32 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार किया गया है, जबकि शशि भूषण दास मठ परिसर स्थित पोखरा के लिए 48 लाख का प्राक्कलन निर्धारित किया गया है। दोनों पोखरों का कार्य एनबीपीडीसीएल के सीएसआर मद से कराया जाएगा।
प्रस्तावित कार्यों के अंतर्गत पोखरों से जलकुंभी की सफाई, मिट्टी की खुदाई एवं चारों ओर तटबंध का निर्माण, पेवर ब्लॉक की बिछाई, सोलर स्ट्रीट लाइट की स्थापना, कॉमन सैनिटेशन सेंटर, वृक्षारोपण तथा अपशिष्ट प्रबंधन हेतु नेडेफ टैंक का निर्माण कराया जाएगा। वहीं घोड़ासहन बाजार के मध्य में ऑडिटोरियम सह पुस्तकालय का निर्माण भी उपरोक्त मद से किया जायेगा।यह सुविधा स्थानीय युवाओं, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। ऑडिटोरियम से सामुदायिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों एवं सरकारी बैठकों हेतु एक सुसज्जित मंच उपलब्ध होगा।

वहीं पुस्तकालय से विद्यार्थियों को अध्ययन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिलेगी। सैनिटेशन सेंटर एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना से सार्वजनिक स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा, वृक्षारोपण से स्थानीय पर्यावरण स्वच्छ एवं हरा-भरा बनेगा,ऑडिटोरियम सह पुस्तकालय से शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विकास को नई गति मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा निर्देश दिया कि उक्त समस्त कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निविदा प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करें, ताकि कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए। निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ढाका, डीआरडीए के अभियंता, प्रखंड विकास पदाधिकारी घोड़ासहन एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

