तेल की कीमतें 100 डाॅलर प्रति बैरल के पार, हमले बढ़े ताे 200 डाॅलर से ऊपर जाएंगी

तेल की कीमतें 100 डाॅलर प्रति बैरल के पार, हमले बढ़े ताे 200 डाॅलर से ऊपर जाएंगी
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में 10 दिनों से जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। साल 2022 के बाद यह पहली बार है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक हो जाएंगीं।

तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु एजेंसी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी इसी स्तर के पार चला गया। तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 10 दिन से जारी युद्ध के कारण हुई है। क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं और अमेरिकी हितों को निशाना बनाकर किए गए हमलों ने वैश्विक आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अरब की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा कॉरिडोर में से एक है। इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की बाधा आती है तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्ग माना जाता है। आम तौर पर इस मार्ग से रोजाना लगभग 15-20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत है। यदि यहां किसी प्रकार की सैन्य गतिविधि या नाकाबंदी होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की भारी कमी हो सकती है।

इस बीच, ईरान के सैन्य नेतृत्व ने एक कड़ी चेतावनी जारी की। ईरानी सेना की यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि यदि अमेरिका और इजराइल ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखते हैं तो पूरे क्षेत्र की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है।

ईरानी अधिकारियों ने हाल के अमेरिका और इजराइल ऑपरेशन को “क्रूर हमले” बताते हुए आरोप लगाया कि इन हमलों में ईरान के तेल और ऊर्जा के आधारभूत संरचना के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है। ईरान ने अरब देशों से भी अपील की है कि वे अमेरिका और इजराइल पर दबाव डालें ताकि तेल सुविधाओं पर हमले रोके जा सकें।

ईरान ने चेतावनी दी कि अगर क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

बीते शनिवार को तेहरान में तेल स्टोरेज डिपो और रिफाइनिंग सुविधाओं पर इजराइल के हवाई हमलाें ने संघर्ष को और तेज कर दिया। यह पहली बार था जब इजराइल ने सीधे तौर पर ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इन हमलों के जवाब में ईरान पहले ही इज़राइल, इराक, जॉर्डन और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र के तेल संयंत्रों और निर्यात सुविधाओं पर हमले बढ़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अभूतपूर्व अस्थिरता देखने को मिल सकती है। खाड़ी के कई अरब देश, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने और महत्वपूर्ण तेल आधारभूत संरचना मौजूद हैं, इस समय संभावित हमलों के खतरे के बीच सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं।

anand prakash

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