मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा में जाने वाले राज्य सभा सांसदों को पंजाब का गद्दार बताया

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा में जाने वाले राज्य सभा सांसदों को पंजाब का गद्दार बताया
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-विधायकों पर ऑपरेशन लोटस नहीं चला तो सांसदों को फंसाया, पंजाब की जनता गद्दारों को सिखाएगी सबक चंडीगढ़, 24 अप्रैल (हि.स.)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले राज्य सभा के सांसदों को पंजाब तथा पंजाबियत का गद्दार करार देते हुए कहा है कि पंजाब की जनता बहुत जल्द उन्हें इस कृत्य का जवाब देगी।आम आदमी पार्टी के सात राज्य सभा सांसदों ने शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। इन सात सांसदों में से छह सांसद पंजाब के हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम के बाद चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सात गद्दारों के पार्टी छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पार्टी पूरी तरह से मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब में तीन सौ यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है और पंजाब को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया है। पंजाब में 19 टोल टैक्स बंद किए गए हैं। भगवंत मान ने आरडीएफ का पैसा रोकने पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि पंजाब में हो रहे विकास कार्य भाजपा को हजम नहीं हो रहे हैं। भाजपा पंजाब वासियों के साथ शुरू से ही धोखा व धक्केशाही करती रही है।

उन्होंने हरियाणा में दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी समेत देश के अन्य कई राज्यों में भाजपा द्वारा किए गए गठबंधनों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा जिस भी दल के साथ गठबंधन करती है उसे खत्म कर देती है। भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में इस तरह का घटनाक्रम पहले भी हो चुका है, जब सुखपाल सिंह खैहरा ने कई विधायकों को तोड़कर अलग गुट बनाया था। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी ने पहले भी कई विधायकों को तोड़ने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी।

उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले राघव चढ्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह भज्जी, विक्रमजीत साहनी तथा राजिंंद्र गुप्ता को पंजाब का सबसे बड़ा गद्दार करार देते हुए कहा कि यह सभी अपनी जान बचाने के लिए भाजपा में गए हैं, लेकिन बहुत जल्द इन सभी को पछताना पड़ेगा। भाजपा में जाने वाले मनप्रीत बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेता आज पंजाब की राजनीति में हाशिए पर हैं। भगवंत मान ने ईडी व अन्य जांच एजेंसियों को चुनौती देते हुए कहा कि वह जब चाहें उनके विरूद्ध जांच कर सकते हैं। पिछले चार साल के दौरान कई बार प्रयास किए, लेकिन कुछ नहीं मिला तो उनके लोगों को दबाना शुरू कर दिया।

anand prakash

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