एमजीसीयू में शिक्षा समागम का आयोजन, शिक्षा,उधोग और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन

एमजीसीयू में शिक्षा समागम का आयोजन, शिक्षा,उधोग और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन
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पूर्वी चंपारण। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से गांधी ऑडिटोरियम में एजुकेशन कॉन्क्लेव के तहत इंडियाज ट्रांसफॉर्मेटिव एजुकेशनल रिवोल्यूशन का भव्य आयोजन हुआ।इस राष्ट्रीय आयोजन में शिक्षा जगत के दिग्गजों, कुलपतियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने नई शिक्षा नीति, उच्च शिक्षा संस्थानों की चुनौतियों, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर गहन विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और कुलगीत के साथ हुआ। कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम बने। उन्होंने विश्वविद्यालयों को नवाचार, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने पर बल दिया। मुख्य अतिथि पूर्वी चंपारण के सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों के सशक्तिकरण की आवश्यकता जताई। पहले तकनीकी सत्र बिहार एचईआईज इन स्पॉटलाइट में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और पूर्व कुलपतियों ने भाग लिया। अध्यक्षता प्रो. रंजीत वर्मा ने की।

बिहार विवि के कुलपति प्रो डीसी राय, ललित नारायण मिथिला विवि के कुलपति प्रो संजय चौधरी, मगध विवि के कुलपति प्रो एसपी शाही समेत अन्य शिक्षाविदों ने राज्य में शोध संस्कृति को मजबूत करने, डिजिटल संसाधनों के विस्तार और उद्योगोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर जोर दिया। पैनल में यह बात उभरकर आई कि बिहार के विश्वविद्यालय संसाधनों की सीमाओं के बावजूद अकादमिक गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत हैं। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने नैक मूल्यांकन, फैकल्टी डेवलपमेंट और स्टूडेंट सपोर्ट सिस्टम पर सवाल रखे। दूसरे सत्र शेयरिंग एक्सपीरियंस विद अकादेमिया में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए। पूर्व कुलपति प्रो. एन.वी. वर्गीज की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में शिक्षण-प्रशासन, आश्वासन और वैश्विक रैंकिंग जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को स्थानीय जरूरतों और वैश्विक मानकों के बीच संतुलन बनाना होगा।

anand prakash

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