औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित

औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित
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नई दिल्‍ली। लोकसभा ने गुरुवार को औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया, जिसका मकसद इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, 2020 में बदलाव करना है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डा. मनसुख मांडविया ने इससे पहले सदन में आज इस विधेयक को विचार और पास करने के लिए में पेश था।केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री ने लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पहले खदान में काम करने वाले या सीवरेज साफ करने वाले श्रमिकों के लिए कम से कम 10 कामगार वाले कंपनी के मजदूरों को ईएसआईसी में इलाज की सुविधा थी। डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया कि श्रम संहिता में खतरे वाले क्षेत्र के कामगार यदि 10 से कम भी हों, तो ईएसआईसी में उपचार की सुविधा मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि आज तक ऐसा होता था कि कोई 5 साल तक काम करता था, तभी उसे ग्रेच्युटी मिलती थी। अब श्रम संहिता में एक साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी की गारंटी है। उन्‍होंने सदन को बताया कि 40 साल से अधिक उम्र वाले हर श्रमिक का हेल्थ चेकअप अनिवार्य किया गया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री ने लोकसभा में वामपंथी दलों की आलोचना करते हुए संशोधित औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक पर जवाब देते हुए कहा कि केरल की एलडीएफ सरकार ने राज्य में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं दिया।

उन्होंने इस विधेयक के लाभों पर प्रकाश डालते हुए समय पर वेतन भुगतान, औद्योगीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रावधान और न्यूनतम वेतन की गारंटी का उल्लेख किया। श्रम एवं रोजगार मंत्री ने कहा कि जिसको जॉब मिलेगी, उसे नियुक्ति पत्र भी मिलेगा, ताकि नौकरी की शर्तों का लिखित प्रमाण रहे। मांडविया ने कहा कि समान काम के लिए महिला और पुरुष कामगारों के वेतन अब अलग नहीं होंगे, पहले इसकी कानूनी पाबंदी नहीं थी। उन्‍होंने कहा कि लेबर कोड (श्रम संहिता) ने समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी दी है।

संसद से पारित औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 का स्थान लेगी, जो व्यापार यूनियनों, औद्योगिक इकाइयों में रोजगार और औद्योगिक विवादों से संबंधित है।

anand prakash

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