मनुष्य का कब क्या हो कोई नही जानता,मरने से पहले ही अपनी तेरहवी कर लेनी चाहिए: अनिरुद्धाचार्य
रक्सौल। बाप की संपत्ति सब बांट लेते है, लेकिन जब बाप के लिए कुछ करने की जरूरत पड़ती है तो बेटे नजर छिपा लेते है। इसलिए लोगों को मरने से पहले ही अपनी तेरहवीं कर लेनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य का कब क्या होगा, यह कोई नहीं जानता। कोरोनाकाल को देख लीजिए जो लोग मरे, उनकी तेरहवी भी नहीं हो सकी। इसलिए मरने से पहले अन्न दान, गौ दान जरूर करें, अपने सामर्थ्य के हिसाब से साधु-संतों को भोजन कराए। उक्त बातें श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के सातवें व अंतिम दिन बुधवार को प्रसिद्ध कथावाचक सह गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने रक्सौल के हवाई अड्डा परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर की असीम कृपा है कि हमलोगों ने मानव जीवन पाया है, इसलिए इस जीवन का सदुपयोग करना चाहिए और अपने आप को भगवान के प्यार में समर्पित होना चाहिए। मनुष्य के जीवन का जब एक साल बीतता है तो देवताओं के 24 घंटे बीतते है। इसलिए भगवान की ऐसी सेवा करें कि अगले जन्म में भगवान उन्हें गोपी बनाकर अपने पास रखे। भगवान का सुदामा से ऐसा प्रेम था कि जब दुनिया उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया तो सुदामा ने भगवान तक अपनी संदेश पहुंचाई तो भगवान प्रेम में पागल होकर सुदामा से मिलने नंगे पैर दौड़े चले आए। अनिरूद्धाचार्य ने अपने भजनों के माध्यम से भक्तों को झुमाया और कई प्रसंगों का उदाहरण देते हुए भागवत के माध्यम से जीवन जीने का मूल मंत्र दिया। कहा कि अपने धर्म में रहकर मर जाना अच्छा है, लेकिन धर्म त्याग कर जीना बेकार है।

यहां बता दे कि भागवत कथा के अंतिम दिन अनुमंडल प्रशासन के द्वारा भक्तों को परेशानी न हो, इसको लेकर मुक्कमल व्यवस्था की गयी थी। एसडीओ मनीष कुमार व डीएसपी मनीष आनंद लगातार कथास्थल पर चहलकदमी करते देखे गए। भागवत कथा श्रवण करने के लिए रक्सौल के साथ-साथ रामगढ़वा, आदापुर, छौड़ादानो, मोतिहारी, सुगौली के अतिरिक्त नेपाल के अलग-अलग इलाके से बड़ी संख्या से श्रद्धालु रक्सौल पहुंचे थे।

