दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को भारत रत्न देने की मांग,विधान परिषद में बीजेपी ने उठाया मुद्दा
पटना। बिहार विधान परिषद में दरभंगा राज के अंतिम महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान करने की मांग की गई।भाजपा के विधान पार्षद घनश्याम ठाकुर ने सदन में सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार को इस संबंध में औपचारिक अनुशंसा भेजे।
श्री ठाकुर ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, राष्ट्रीय रक्षा, संविधान निर्माण और संस्कृति के क्षेत्र में डॉ. कामेश्वर सिंह का योगदान केवल मिथिला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि मिथिला के महापुरुषों को उनका उचित राष्ट्रीय सम्मान दिलाना हम सबका दायित्व है और इस दिशा में उनकी पहल जारी रहेगी।
उल्लेखनीय है,कि महाराजा कामेश्वर सिंह (1907-1962) दरभंगा राज के अंतिम जमींदार थे। जिन्होने मिथिला समेत पूरे देश के लिए कई रचनात्मक व सांस्कृतिक योगदान दिये। वे भारतीय संविधान सभा के सदस्य रहे और संविधान निर्माण प्रक्रिया में भागीदारी की। आजादी के बाद वे राज्यसभा के सदस्य भी बने। उन्होंने लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलनों में भी हिस्सा लिया था। उन्होने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को आर्थिक सहयोग दिया।साथ ही उन्होने अपना ‘आनंद बाग पैलेस’ संस्कृत शिक्षा के लिए दान किया, जहां आज कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का मुख्यालय भी उनकी विरासत का हिस्सा है। उन्होंने चीनी, जूट और कागज उद्योग स्थापित किए। साथ ही ‘द आर्यावर्त’ (हिंदी) और ‘The Indian Nation’ (अंग्रेजी) जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों की स्थापना की, जो लंबे समय तक बिहार की पत्रकारिता में अग्रणी रहा।

