दूध-केला से भी पौष्टिक मोरिंगा” ग्रामीणों में खूब हो रही चर्चा

दूध-केला से भी पौष्टिक मोरिंगा” ग्रामीणों में खूब हो रही चर्चा
Facebook WhatsApp


– डॉ. गजेंद्र कुमार ने दी महत्वपूर्ण जानकारी


पताही।  प्रखंड क्षेत्र के जिहुली पंचायत में इन दिनों स्वास्थ्य को लेकर एक नई जागरूकता लहर देखी जा रही है। गांव में सहजन (मोरिंगा) के पत्तों को लेकर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि-“दूध और केला का बाप है मोरिंगा के पत्ते। ”इस विषय पर सबसे अहम बयान  जिहुली के ही प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र कुमार ने दी है। उन्होंने बताया कि सहजन के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व इतने अधिक हैं कि सामान्य आहार में मिलना मुश्किल है। सहजन के पत्तों में दूध से अधिक कैल्शियम, केले से ज्यादा पोटैशियम,
और पालक से कई गुना अधिक आयरन पाया जाता है।
डॉ. का कहना है कि यदि ग्रामीण रोजमर्रा के भोजन में थोड़ा-सा सहजन पत्ती शामिल करें, तो कुपोषण, कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याओं में काफी कमी आ सकती है।
जिहुली पंचायत और आसपास के गांवों में महिलाएं को सहजन के पत्तों को सुखाकर पाउडर बनाकर अगर बेचती हैं तो उन्हें अतिरिक्त आय भी होगा। वहीं किसानों का कहना है कि सहजन के पेड़ की देखभाल आसान है और लागत भी न के बराबर है, इसलिए इसे पूरक फसल के रूप में भी अपनाया जा सकता है। पताही प्रखंड स्तर पर भी सहजन के उपयोग को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है, ताकि इस “स्थानीय सुपरफूड” का लाभ हर घर तक पहुंच सके।
ग्रामीणों की जुबान पर अब एक ही बात है।

anand prakash

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page